Tuesday, March 17, 2026
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उपमंडल बंगाणा की पंचायतों के अधिकतर किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और यह खेती उनके लिए वरदान सावित हुई हैं।

जोल/ अजय शर्मा

उपमंडल बंगाणा के किसानों ने इस महंगाई के दौर मे पिछले काफ़ी लम्बे अरसे से खेती करना ही छोड़ दिया था जिसका कारण महंगी खाद व महंगी रासायनिक दवाइयां थी किसानों का अपने खेतोँ मे खाद व दवाईयां डालने मे बहुत ज्यादा खर्च होता था लेकिन खेतोँ मे जो फ़सल होती थी उसकी लागत खर्च की उपेक्षा बहुत कम होती थी जिससे किसानों ने अपनी उपजाऊ भूमि पर फसलों को उगाना ही बंद कर दिया था। लेकिन प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना किसानों के लिए कम लागत की खेती साबित हो रही हैं
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उप मण्डल बंगाणा की उप तहसील जोल की महिला किसान का कहना हैं कि हमारे लिए प्राकृतिक खेती कम लागत व ज्यादा मुनाफे वाली खेती साबित हो रही हैं किसान का कहना हैं कि हमने पिछले लगभग 10 वर्षो से खेती करना छोड़ दिया था क्यूंकि खेती करने मे खर्चा बहुत ज्यादा हो जाता था लेकिन फसल खर्च की उपेक्षा आधी भी नहीं होती थी। लेकिन अप्रैल 2025 मे क़ृषि विभाग बंगाणा से हमारे घर दो महिला क़ृषि सखी आयी और उन्होंने हमें प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना की जानकारी दी उसके बाद हमने अपनी 10 कनाल भूमि पर प्राकृतिक तरीके से खेती करने का मन बनाया शुरू शुरू मे तो यह खेती कठिन लगती रही लेकिन अब प्राकृतिक तरीके से खेती करने पर बहुत अच्छे परिणाम आ रहे हैं। हमने जून 2025 मे 20 किलो अदरक का बीज 150 रूपये प्रति किलो की दर से बाजार से खरीद कर उसकी बिजाई की थी जिसकी क़ीमत लगभग 3000 रूपये आयी थी अभी जनबरी 2026 मे ज़ब हमने अपने खेत से अदरक निकाला तो उसका उत्पादन लगभग 100 किलो से भी अधिक हुआ। प्राकृतिक अदरक होने के कारण यह अदरक मेरे गांव व साथ लगते गाँवो के लोग घर से आकर ही ले गए। जोकि मैंने 150 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा मैंने अबतक 15000 रूपये का अदरक बेच दिया हैं और कुछ अभी भी अगली बार बिजाई करने के लिए रख लिया हैं। मैंने जून 2025 मे अपने खेत मे देसी हल्दी की खेती भी की थी 10 किलो हल्दी का बीज मैंने गांव के एक किसान से 90 रूपये प्रति किलो के हिसाब से लिया था । जिसकी क़ीमत 900 रूपये आयी थी अब जनबरी 2026 मे खेत से हल्दी निकालने पर लगभग 80 किलो हल्दी का उत्पादन हुआ हैं जोकि मेरे गांव के अन्य किसानो ने कच्ची हल्दी खुद के खेतोँ मे बिजाई करने के लिए खरीद ली हैं जिसमे मुझे 7000 रूपये का लाभ प्राप्त हुआ हैं बाकि भूमि पर मैंने मक्की, तिल, सोयाबीन, की खेती की थी जिसका मुझे अच्छा उत्पादन प्राप्त हुआ था। अभी वर्तमान मे मैंने अपनी भूमि पर गेहूं, चना, सरसों व मटर की मिश्रित खेती की हुई हैं व उसके साथ ही प्याज़, देसी लहसुन व अमेरिकन हाथी लहसुन की प्राकृतिक विधि से खेती कर रही हूं। जिसमे मेरा परिवार भी साथ दे रहा हैं।

वीना देवी
किसान ग्राम पंचायत अम्बेहड़ा धीरज उपमंडल बंगाणा जिला ऊना हिमाचल प्रदेश

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उपमंडल बंगाणा से लगभग तीन हजार किसान अपनी 600 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना’ के तहत रासायनिक मुक्त खेती अपना रहे हैँ। इन किसानो को घर घर जाकर खेती करने का प्रशिक्षण समय समय पर दिया जा रहा है जिससे मिट्टी और किसानों की आय में सुधार हो सके। सरकार पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके इसे बढ़ावा दे रही है, जिसमें देसी गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग, जैविक इनपुट, और बाजार तक पहुंच शामिल है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहे हैं और प्रदूषण कम हो रहा है। इन्होने प्राकृतिक खेती को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का मिश्रण बताया और इसे छोटे किसानों की आय बढ़ाने और रासायनिक मुक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण बताया। प्राकृतिक खेती से कम लागत, अधिक आय: रासायनिक खाद-कीटनाशकों पर निर्भरता खत्म होती है, जिससे लागत घटती है और आय बढ़ती है। मिट्टी और पर्यावरण के स्वास्थ्य मे सुधार मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जल प्रदूषण और रासायनिक प्रदूषण कम होता हैं ।

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