ऊना ब्यूरो रिपोर्ट, शिवानी ठाकुर

प्रदेश भाजयुमो उपाध्यक्ष चैतन्य शर्मा ने आरोप लगाया है कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री केंद्रीय बजट को लेकर जनता के सामने गलत आंकड़े पेश कर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि मोदी सरकार ने बजट में हिमाचल के विकास के लिए अभूतपूर्व प्रावधान किए हैं और राज्य को लगातार बढ़ती वित्तीय सहायता मिल रही है।
चैतन्य शर्मा ने कहा कि इस वर्ष हिमाचल को टैक्स डेवोल्यूशन के तहत लगभग ₹14 हजार करोड़ मिले हैं, जो पिछले बजट से करीब ₹2500 करोड़ अधिक हैं। यह राशि सीधे तौर पर प्रदेश की जनता के हित में खर्च होगी और विकास कार्यों को गति देगी।
उन्होंने बताया कि आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए रेलवे विस्तार हेतु लगभग ₹3 हजार करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही प्रदेश में 2700 किलोमीटर फोरलेन हाईवे का निर्माण जारी है, जिस पर लगभग ₹40 हजार करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सीआरएफ और बीआरओ के माध्यम से सड़कों के लिए अलग से करीब ₹10 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों के लिए भी केंद्र ने पर्याप्त बजट सुनिश्चित किया है।
भाजयुमो नेता ने कहा कि वर्ष 2020 से 2026 के बीच हिमाचल को लगभग ₹8 हजार करोड़ की विशेष सहायता मिली, जिसमें से ₹1200 करोड़ गत वर्ष जारी किए गए। इसके बावजूद प्रदेश सरकार अपनी विफलताओं का ठीकरा केंद्र पर फोड़ रही है।
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अब नया नैरेटिव गढ़ा जा रहा है— “रात को सपना आता है और सुबह ₹50 हजार करोड़ की मांग खड़ी हो जाती है।” चैतन्य शर्मा ने सवाल किया कि आपदा के समय मिले लगभग ₹6 हजार करोड़ का क्या उपयोग हुआ? करीब एक लाख पक्के मकानों के आवंटन में हुई कथित बंदरबांट का जवाब जनता चाहती है।
उन्होंने आगे बताया कि वबी-जीराम जी योजना में ₹95 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो मनरेगा से लगभग ₹15 हजार करोड़ अधिक है। मनरेगा की पिछली देनदारियों के लिए भी ₹30 हजार करोड़ रखे गए हैं, लेकिन प्रदेश सरकार कार्यों को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखा रही और अपना हिस्सा देने से बच रही है।
चैतन्य शर्मा ने कहा कि ग्रामीण विकास, पंचायती राज और शहरी विकास के लिए केंद्रीय बजट में पर्याप्त धन उपलब्ध है, लेकिन प्रदेश सरकार केवल यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है कि केंद्र ने पैसा नहीं दिया। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि धरना–प्रदर्शन की राजनीति छोड़कर विकास कार्यों पर ध्यान दिया जाए, ताकि हिमाचल की जनता को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।

