प्रिया शर्मा कुल्लू

अक्सर देखा जाता है कि जो गायें लंबे समय तक दूध देती हैं, वे बाद में गर्भधारण करने में असमर्थ हो जाती हैं और बांझ हो जाती हैं। कई प्रयासों के बावजूद जब गाय गर्भ धारण नहीं कर पाती, तो कुछ गौपालक उन्हें बोझ समझकर आवारा छोड़ देते हैं। इससे न केवल पशुपालकों को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि गौवंश भी सड़कों पर भटकने को मजबूर हो जाता है।
इसी समस्या को देखते हुए पशु चिकित्सकों ने इस पर गहन शोध किया। रिसर्च के दौरान पाया गया कि उचित उपचार और वैज्ञानिक तरीके अपनाने से ऐसी गायों में दोबारा दूध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, गायों को लगातार 9 दिनों तक विशेष प्रोसेसिंग टीके लगाए जाते हैं, जिसके बाद दूध बढ़ाने की दवा दी जाती है। इस उपचार के मात्र 15 दिनों के भीतर गाय में दोबारा दूध आना शुरू हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज पशुपालकों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है। इससे बांझ मानी जाने वाली गायें फिर से उत्पादक बन सकती हैं और उन्हें आवारा छोड़ने की नौबत नहीं आएगी।
पशुपालकों से अपील की गई है कि वे गायों को त्यागने के बजाय नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क कर वैज्ञानिक उपचार करवाएं।

