Tuesday, March 17, 2026
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भाजपा हिमाचल प्रदेश के हितों के खिलाफ खड़ी : केवल सिंह पठानिया

धर्मशाला/पालमपुर/राकेश कुमार

भाजपा का आरडीजी पर असली चेहरा प्रदेश के सामने बेनकाब हो चुका है, विधानसभा सत्र के दौरान आरडीजी बहाल करने के लिए नियम 102 के तहत लाए गए सरकारी प्रस्ताव का विरोध कर भाजपा ने अपना वास्तविक चेहरा उजागर कर दिया है। उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि भाजपा नेताओं से सवाल करते हुए कहा कि आरडीजी के मुद्दे पर एक बार भी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि क्या भाजपा आरडीजी को बंद करने के पक्ष में है या नहीं? उन्होंने कहा कि इससे पहले आपदा प्रभावितों को विशेष आर्थिक सहायता देने संबंधी विधानसभा प्रस्ताव का भी भाजपा विधायकों ने समर्थन नहीं किया था। प्रदेश की जनता देख चुकी है कि भाजपा हिमाचल प्रदेश के अधिकारों के लिए कभी खड़ी नहीं होती। उन्होंने कहा कि जब भाजपा प्रदेश में सत्तासीन थी तो हिमाचल प्रदेश की सीमित आर्थिक संसाधनों और भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए पंद्रहवें और सोलहवें वित्त आयोग के समक्ष प्रदेश को आरडीजी देने की पुरजोर वकालत की थी। जब जय राम ठाकुर के कार्यकाल में प्रदेश को 56 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के अतिरिक्त 14 हजार करोड़ रुपये का जीएसटी क्षतिपूर्ति (कंपनसेशन) प्राप्त हुआ, तब आरडीजी पर कोई आपत्ति नहीं थी, तो अब विरोध क्यों? क्या इसलिए कि आज हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है?
उन्होंने कहा कि भाजपा नेता केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली धनराशि को आर्थिक मदद के रूप में गिना रहे हैं, जबकि यह प्रदेश की जनता का अधिकार है। इस प्रकार के बेतुके स्पष्टीकरण प्रदेश के लोगों के गले नहीं उतरने वाले। उन्होंने कहा कि आरडीजी हिमाचल प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है, जिसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 275(1) में किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खु के नेतृत्व में हिमाचल सरकार ने पहले दिन से ही जनसेवा को सरकार का मूल मंत्र बनाया और इसी भावना के साथ हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए नए संसाधनों के सृजन पर बल दिया है। संसाधनों के सही इस्तेमाल से राज्य को पिछले तीन वर्षों में 26 हजार 683 करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई है। बीबीएमबी परियोजनाओं में 12 प्रतिशत निःशुल्क ऊर्जा राॅयल्टी, हिमाचल प्रदेश की स्थायी सदस्यता तथा माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार बकाया लगभग 6 हजार 500 करोड़ रुपये जारी करवाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

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