Tuesday, March 17, 2026
HomeHImachal NewsSolanराज्यसभा में गूंजा जनजातीय छात्रों का मुद्दा

राज्यसभा में गूंजा जनजातीय छात्रों का मुद्दा

परवाणु/अमित ठाकुर

राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. सिकंदर कुमार ने राज्यसभा में जनजातीय छात्रों की शिक्षा और भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने जनजातीय कार्य मंत्री से सवाल किया कि हाल ही में 11 राज्यों के 144 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) को शामिल करने वाले ओएनजीसी समझौता ज्ञापन के बाद, शेष 499 कार्यशील ईएमआरएस को वर्ष 2026 के अंत तक सीएसआर-वित्तपोषित अवसंरचना मॉडल में शामिल करने की क्या कार्ययोजना है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने यह भी पूछा कि इन कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों से जनजातीय छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों और रोजगार में वास्तविक लाभ कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने सभी जनजातीय विद्यालयों में एक समान मानक तय करने के लिए स्थायी सीएसआर–ईएमआरएस प्रकोष्ठ गठित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस पर जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने सदन को बताया कि मंत्रालय राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) के माध्यम से सीएसआर साझेदारियों का विस्तार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कोल इंडिया, नॉर्दन कोलफील्ड्स, ओएनजीसी, बीपीसीएल जैसी कंपनियों के साथ ईएमआरएस के लिए कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।
राज्यमंत्री ने कहा कि इन सीएसआर पहलों के तहत डिजिटल शिक्षा, अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं और छात्रों-शिक्षकों का क्षमता निर्माण किया जा रहा है। एनएसटीएफडीसी और एनईएसटीएस के माध्यम से लागू योजनाएं परिणामोन्मुख हैं और जनजातीय छात्रों को उच्च शिक्षा व रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं। हालांकि फिलहाल अलग से सीएसआर–ईएमआरएस प्रकोष्ठ बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि जनजातीय छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि सीएसआर संसाधनों का सही और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

RELATED ARTICLES

Most Popular