जोल/वीरेंद्र बन्याल

उप तहसील जोल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत अम्बेहडा धीरज शिववाड़ी वेलफेयर सोसाइटी अटया द्वारा रविवार को आयोजित किया गया। इस विराट हिंदू महासम्मेलन का थीम “स्वयं परिवर्तन से राष्ट्र धर्म प्रोन्नत” था, इस सम्मेलन में महंत श्री विष्णु देवनंद जी महाराज की कृपा पात्र उमेश आनंद जी महाराज जोगी पंगा धाम ऊना वाले भी मौजूद थे। उमेश आनंद महाराज जी ने यह संदेश दिया गया कि व्यक्तिगत सुधार और आत्मनिर्भरता से ही राष्ट्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धारा को मजबूती दी जा सकती है। इस आयोजन में भाग लेने वाले विभिन्न संत, समाजसेवी, और विचारक ने हिंदू समाज को आत्मबल और संगठन के महत्व को समझाने का प्रयास किया।
इस सम्मेलन में मुख्य बिंदु थे:
- स्वयं परिवर्तन की आवश्यकता:
सम्मेलन में यह जोर दिया गया कि एक मजबूत और एकजुट समाज के लिए पहले हर व्यक्ति को अपने आचरण में बदलाव लाना होगा। “स्वयं परिवर्तन” का मतलब था कि हर व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत जीवन में आदर्शों को अपनाना होगा जैसे कि ईमानदारी, संयम, और अपनी संस्कृति से जुड़ा रहना। - राष्ट्र धर्म की पुनरस्थापना:
समाज के धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन में सुधार लाने के लिए यह जरूरी है कि हर हिंदू व्यक्ति अपने राष्ट्र धर्म को समझे और उस पर खरा उतरे। राष्ट्र धर्म का मतलब केवल धार्मिक आस्था से नहीं, बल्कि अपने समाज और देश की जिम्मेदारी समझकर कार्य करना है। - संस्कार और संस्कृति का संरक्षण:
संस्कार और भारतीय संस्कृति के संरक्षण की बात की गई। वक्ताओं ने बताया कि अगर समाज को मजबूत बनाना है, तो हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और मूल्यों को प्राथमिकता देनी होगी। इसमें विशेष रूप से मातृभूमि के प्रति सम्मान, परिवार की अहमियत और परंपरागत शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने की बात की गई। - राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता:
राजनीतिक मंच पर भी हिंदू समाज को एकजुट करने की आवश्यकता की बात की गई। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्र की समृद्धि और प्रगति के लिए हिंदू समाज को राजनीतिक और सामाजिक मामलों में अपनी सक्रिय भागीदारी बढ़ानी होगी। विशेष रूप से धर्म, संस्कृति और समाज के हित में निर्णय लेने वाले नेताओं का चुनाव करना महत्वपूर्ण होगा। - आध्यात्मिक जागरण:
सम्मेलन में यह भी कहा गया कि आध्यात्मिक जागरण से ही समाज की मानसिकता बदल सकती है। संतों और गुरुजनों ने यह सुझाव दिया कि हर व्यक्ति को अपने भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा और शक्ति का विकास करना चाहिए, ताकि समाज और राष्ट्र की दिशा सही हो सके। - हिंदू समाज का संगठन:
हिंदू समाज को संगठित करने के लिए विभिन्न संगठनों, मंदिरों और समुदायों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। सभी धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक समूहों को मिलकर एक साझा उद्देश्य की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।
समापन:
विराट हिंदू महासम्मेलन में यह संदेश दिया गया कि जब हम अपने आचरण में सुधार लाएंगे, अपनी संस्कृति और धर्म को सही दिशा में बढ़ाएंगे, और एकजुट होकर राष्ट्र के लिए काम करेंगे, तब ही हम एक समृद्ध और सशक्त राष्ट्र बना सकते हैं। सम्मेलन ने यह भी दर्शाया कि व्यक्तिगत और सामाजिक परिवर्तन से ही राष्ट्र की प्रगति संभव है।
इस तरह के आयोजनों से समाज में जागरूकता फैलाने और हिंदू समाज को एकजुट करने के प्रयास किए जाते हैं। इस अवसर पर आचार्य शिव कुमार शास्त्री, जिला कुटुंब प्रबोधन जगदीश धीमान ,मेजर कर्नल तरसेम राणा, आचार्य रमेश शास्त्री, समाजसेवी एवं महालक्ष्मी इंडस्ट्री के अध्यक्ष योगराज योगी, खंड चालक निर्मल, खंड कार्यवाहक पुष्पेंद्र, आचार्य सिद्धार्थ पांडे, संजीव शर्मा और सैंकड़ों हिंदू कार्यकर्ता में हिंदू कार्यकर्ता सम्मेलन में उपस्थित रहे।

