आपदा के बाद निगम के इंजीनियरों की मेहनत रंग लाई1
सैंज/प्रेम सागर चौधरी

कुल्लू जिला में ऊर्जा उत्पादन में मील का पत्थर साबित हुई सैंज जल विद्युत परियोजना में ऊर्जा उत्पादन शुरू हो गया है। प्राकृतिक आपदा के बाद करीब सात महिने प्रोजेक्ट के पहिए बंद रहने से जहां प्रदेश पावर निगम को करोड़ों रुपए का नुकसान झेलना पड़ा वहीं प्रोजेक्ट के इंजीनियरों की अथक मेहनत रंग लाई है। लिहाजा 100 मेगावाट क्षमता वाले सैंज प्रोजेक्ट में फिर करंट आ गया है तथा प्रबंधन वर्ग में खुशी की लहर दौड़ गई है। गत वर्ष जून माह में सैंज के जीवा नाला में आई प्राकृतिक बाढ़ से पिन पार्वती नदी बेसिन के तमाम हाइड्रो प्रोजेक्ट पर प्रकृति की मार पड़ी थी जिस कारण ऊर्जा कंपनियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा था। प्रदेश सरकार के प्रतिष्ठित सौ मेगावाट क्षमता वाले सैंज प्रोजेक्ट में सात महिने तक ऊर्जा उत्पादन बंद रहा। जिस कारण प्रदेश पावर निगम को भारी आर्थिक नुक्सान हुआ। पिछले सात महीनों से प्रोजेक्ट के इंजीनियरों ने दिन-रात एक करते हुए आखिर प्रोजेक्ट को पटरी पर लाया है। प्रोजेक्ट के प्रमुख मनीष चौधरी ने बताया कि निगम के इंजीनियरों, कर्मचारियों व कामगारों ने चुनौती स्वीकार करते हुए दिन रात एक किया तथा भूमिगत पावर हाउस के भीतर प्रोजेक्ट की मशीनरी तथा अन्य निर्माण कार्यों को बखूबी अंजाम दिया। आलम यह है कि प्रोजेक्ट की मशीनरी दनादन दौड़ रही है। गौरतलब यह है कि सैंज नदी के वेसिन में नतीजतन हर वर्ष प्राकृतिक आपदा आती है और तमाम प्रोजेक्ट इस आपदा को झेलने के लिए मजबूर है। हालांकि प्रदेश पावर निगम ने प्रोजेक्ट में बाढ़ पूर्व चेतावनी हेतु संयंत्र फिट किए हैं किंतु कुदरत के सामने यह सब फीके साबित हो रहे हैं। पार्वती तथा इसकी सहायक सैंज नदी गुस्सैल मानी जाती है तथा इसके प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ना नया खतरा बन सकता है। बीते तीन वर्षों में आई प्राकृतिक बाढ़ ने वर्षों का विकास एक ही दिन में तबाह कर दिया और करोड़ों रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। बहरहाल आपदा के सात माह बाद सैंज प्रोजेक्ट में अच्छे दिन आते ही ऊर्जा उत्पादन शुरू हो गया है।
बॉक्स हेतु
प्राकृतिक आपदा के सात माह बाद निगम के इंजीनियरों व कामगारों की अथक मेहनत से सैंज प्रोजेक्ट में ऊर्जा उत्पादन शुरू हुआ है और तमाम प्रबंधन वर्ग बधाई के पात्र है।

