तलमेहडा खड़ोह रिंकू भारद्वाज

सुंगल गांव में स्वर्गीय कादशी देवी की पावन स्मृति में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन श्रद्धापूर्वक किया जा रहा है। यह सात दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम कुलदीप डोगरा और सरोज डोगरा द्वारा आयोजित किया गया है, जिसमें क्षेत्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं।
कथा का वाचन विद्वान आचार्य संजय शास्त्री अपने मुखारविंद से कर रहे हैं। कथा के दौरान आचार्य संजय शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हिमालय में स्थित बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ धाम केवल तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि मोक्ष के पावन द्वार हैं।
उन्होंने बताया कि केदारनाथ भगवान शिव का धाम है, जबकि बद्रीनाथ भगवान विष्णु की तपोभूमि है। पौराणिक मान्यता के अनुसार पहले यह क्षेत्र शिव की तपस्थली था, लेकिन जब विष्णु ने लोककल्याण के लिए यहाँ तपस्या की, तब शिव ने उन्हें स्थान प्रदान किया और स्वयं केदारनाथ में ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हो गए।
आचार्य ने आगे बताया कि जब भगवान विष्णु तप में लीन थे, तब माता लक्ष्मी ने बद्री वृक्ष का रूप धारण कर उन्हें हिमपात से बचाया, इसी कारण यह स्थान बद्रीनाथ कहलाया।
कथा के क्रम में धुंधुकारी और गोकर्ण का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य संजय शास्त्री ने कहा कि भागवत पुराण में वर्णित यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चे मन से कथा श्रवण और भक्ति करने से प्रेत योनि तक से मुक्ति मिल सकती है। गोकर्ण द्वारा सात दिन तक भागवत कथा सुनाने से धुंधुकारी को मोक्ष प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि मनुष्य चाहे कितना भी पापी क्यों न हो, यदि वह श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान का नाम ले और सत्संग में जुड़े, तो उसका कल्याण निश्चित है।
इस अवसर पर प्रतिदिन भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जा रहा है, जिससे पूरे गांव में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। सात दिनों तक चलने वाली इस कथा में आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

