प्रेम सागर चौधरी

माता दुर्गा वनोगी देहुरी के मुख्य अंगरक्षक माने जाने वाले शमशानी वीर सोमवार को जैसे ही 50 दिनों बाद स्वर्ग प्रवास से लौटे वैसे ही देवालय में पुनः रोनक लौट आयी। हारियानों ने अक्षत, अख़रोट और पुष्पों से अपने आराध्य देव का स्वागत किया। इस मौके पर पुंडीर ऋषि व माता दुर्गा के मुख्य कारकूनों ने शमशानी वीर के दरबार में हाजिरी भरी। वनोगी कोठी में अष्टभुजा माता दुर्गा के आठ अंगरक्षक देवताओं में शमशानी वीर का मुख्य स्थान माना जाता है। माता दुर्गा के हूम पर्व पर शमशानी वीर के गूर व माता के साथ अन्य सात देवताओं के गूर के माध्यम से असूरी शक्तियों के प्रकोप वाले महिला व पुरुषों को माता की आज्ञा से तुरंत ठीक किया जाता है। किसी भी देवकार्य में शमशानी वीर का गूर दाहिनी ओर खड़ा होता है। जिसे धूर के नाम से जाना जाता है। इस मौके पर गूर रोशनलाल ने देवखेल के माध्यम से पूरे हारियानों को शुभाशीष देकर बर्ष भर की भविष्यवाणी भी की। पूरे दिन भर शमशानी वीर के धमेउल में भीड़ लगी रही।

