Tuesday, March 17, 2026
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कर्मचारी महासंघों के संयुक्त सम्मेलन में जलशक्ति कर्मियों को उपमुख्यमंत्री ने दिया भरोसा…

स्पर्श शर्मा

“मैं आपके साथ, हर जायज़ मुद्दे का होगा समाधान”

ऊना, 7 फरवरी. उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने जलशक्ति विभाग के कर्मचारी महासंघों के संयुक्त सम्मेलन में कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनकी सभी जायज़ समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
यह सम्मेलन शनिवार को हरोली स्थित पालकवाह ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया।
उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान संभव न हो। आप विश्वास रखें, मैं आपके साथ हूं और आपके सभी जायज़ मुद्दों का समाधान किया जाएगा।
सम्मेलन के दौरान कर्मचारियों ने नियमितीकरण, पदोन्नति, पेंशन, नीति निर्माण, ड्यूटी व्यवस्था सहित विभिन्न विषयों से संबंधित अपनी समस्याएं और अपेक्षाएं उपमुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। उपमुख्यमंत्री ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना और प्रत्येक जायज़ मांग के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जिन मामलों में नीति की आवश्यकता होगी, वहां सरकार नई नीति बनाएगी और सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विभाग में प्रक्रियागत तरीके से पक्की भर्तियां सुनिश्चित की जा रही हैं,जिससे कर्मचारियों को पेंशन लाभ से जोड़ा जा सके।
उन्होंने बताया कि जलशक्ति विभाग में 419 करुणामूलक भर्तियां की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार ने ओल्ड पेंशन स्कीम लागू कर कर्मचारियों को बुढ़ापे की गारंटी दी है। एचआरटीसी में भी ओपीएस लागू की जा चुकी है और जो कर्मचारी अभी इस व्यवस्था से वंचित हैं, उन्हें भी इसमें शामिल कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था की उपयोगिता अथवा अनुपयोगिता पर भी गंभीरता से मंथन किया जा रहा है ।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जलशक्ति विभाग के कर्मचारी अत्यंत कठिन और विपरीत परिस्थितियों और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देते हैं। प्रदेश के हर नागरिक तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना कोई छोटा कार्य नहीं है और इसके लिए विभाग के कर्मचारियों का योगदान सराहनीय है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सीमित राजस्व संसाधनों के बावजूद सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि जीएसटी व्यवस्था हिमाचल प्रदेश के लिए पहले ही नुकसानदेह रही है और अब राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को समाप्त कर केंद्र सरकार ने प्रदेश को धोखा दिया है। लेकिन राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के साथ किसी प्रकार का धोखा नहीं होने देगी।
उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में हिमाचल प्रदेश को लगभग 38 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में प्राप्त हुए थे। वर्तमान परिस्थितियों में यह अपेक्षा थी कि यह सहायता बढ़ेगी, लेकिन इसके विपरीत आरडीजी को ही समाप्त कर दिया गया, जिससे प्रदेश के समक्ष गंभीर वित्तीय चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा करीब साढ़े बारह सौ करोड़ रुपये की राशि अभी तक जारी नहीं की गई है। इसके बावजूद इस मिशन के तहत नियुक्त कर्मचारियों का वेतन राज्य सरकार अपने संसाधनों से वहन कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि लंबे समय से लंबित योजनाओं को पूरा करने के लिए धन का प्रबंध किया गया है। फिना सिंह योजना के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे कार्य आगे बढ़ा। मंडी जिला के धर्मपुर क्षेत्र की लंबित जल योजनाओं के लिए भी धनराशि प्राप्त की गई है।
उन्होंने कहा कि जलशक्ति विभाग में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी ईश्वर द्वारा एक विशेष दायित्व के लिए चुने गए सेवक हैं। पहले समाज में प्याऊ लगाना पुण्य माना जाता था, आज वही सेवा जलशक्ति विभाग के माध्यम से हो रही है। उन्होंने कर्मचारियों से जल से जुड़े कार्य को ईश्वर का दिया अवसर मानकर पूरी निष्ठा से निभाने का आह्वान किया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कभी हरोली क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत रहती थी, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और यह क्षेत्र नकदी फसलों का गढ़ बन चुका है। एक समय पीने के लिए पानी नहीं होता था, आज खेत लहलहा रहे हैं। यह परिवर्तन जलशक्ति विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है।
कार्यक्रम में आईटीआई प्रशिक्षित पंप ऑपरेटर कल्याण

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