“पर्यावरण की रक्षा, मानवता की सुरक्षा।”

ऊना
विश्व पर्यावरण दिवस हर वर्ष 5 जून को मनाया जाने वाला संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा पर्यावरणीय जन-जागरूकता अभियान है। इसकी शुरुआत 1972 में हुई थी और 1973 से इसका नियमित आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों, सरकारों और संस्थाओं को सक्रिय करना है।
वर्ष 2026 की वैश्विक थीम “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” रखी गई है। यह थीम स्पष्ट संदेश देती है कि जलवायु संकट का समाधान केवल तकनीकी उपायों से नहीं बल्कि प्रकृति के संरक्षण और पुनर्स्थापन से भी संभव है। जंगल, नदियां, आर्द्रभूमियां, मैंग्रोव वन और जैव विविधता पृथ्वी की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली हैं। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के क्षरण, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति विश्व समुदाय को जागरूक करना है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के नेतृत्व में आयोजित यह दिवस दुनिया भर के देशों, संस्थाओं और नागरिकों को प्रकृति-आधारित समाधानों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।वर्ष 2026 में वैश्विक मेजबानी अजरबैजान द्वारा की जा रही है। मुख्य कार्यक्रम राजधानी बाकू में आयोजित हो रहे हैं।विश्व पर्यावरण दिवस वर्तमान में दुनिया के 150 से अधिक देशों में मनाया जाता है। विभिन्न देशों में रैलियां, वृक्षारोपण अभियान, स्वच्छता कार्यक्रम, पर्यावरण सम्मेलन और जन-जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।आज पृथ्वी तीन बड़े पर्यावरणीय संकटों से घिरी हुई है:प्रदूषण संकट : वायु, जल, मिट्टी और ध्वनि प्रदूषण मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को प्रभावित कर रहे हैं।जलवायु परिवर्तन: ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन से पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ रहा है।जैव विविधता संकट: पौधों और जीव-जंतुओं की हजारों प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी हैं।

यदि वर्तमान स्थिति जारी रही तो मानव समाज को निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है:
खाद्य संकट,पेयजल संकट,समुद्री तटों का डूबना
,स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं, कृषि उत्पादन में गिरावट,पर्यावरणीय विस्थापन,आर्थिक अस्थिरता
प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति
इसके लिए प्रकृति आधारित समाधान अपनाना होगा जैसे
वनों का संरक्षण, वृक्षारोपण
जल संरक्षण, आर्द्रभूमियों का पुनर्जीवन,,जलवायु-अनुकूल जीवनशैली,ऊर्जा बचत सौर ऊर्जा का उपयोग,सार्वजनिक परिवहन,कार्बन उत्सर्जन में कमी,सामुदायिक भागीदारी।
स्थानीय पर्यावरण अभियानों में भागीदारी, स्कूल एवं कॉलेज स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026: इतिहास
विश्व पर्यावरण दिवस की जड़ें पर्यावरण कूटनीति के एक महत्वपूर्ण मोड़ से जुड़ी हैं: 5 जून, 1972 को स्टॉकहोम में मानव पर्यावरण पर आयोजित सम्मेलन। यह संयुक्त राष्ट्र का पहला बड़ा सम्मेलन था जो अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण मुद्दों और जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित था।
1972: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आधिकारिक तौर पर 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में नामित किया।
1973: पर्यावरण संबंधी मामलों पर वैश्विक प्राधिकरण के रूप में कार्य करने के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की स्थापना की गई।
1974: विश्व पर्यावरण दिवस का पहला आयोजन “केवल एक पृथ्वी” की चिरस्थायी थीम के साथ मनाया गया।
1972: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आधिकारिक तौर पर 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में नामित किया।
1973: पर्यावरण संबंधी मामलों पर वैश्विक प्राधिकरण के रूप में कार्य करने के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की स्थापना की गई।
तब से इस आयोजन में अम्लीय वर्षा, ओजोन परत का क्षरण, जहरीले रसायन और चल रहे जलवायु संकट सहित कई बड़े वैश्विक खतरों से निपटा गया है।
मिट्टी पृथ्वी पर सबसे अधिक जैव विविधता वाला आवास है, जो सभी जीवित प्रजातियों के 59% से अधिक को आश्रय देती है। फिर भी, प्रकृति को केवल 3 सेंटीमीटर ऊपरी मिट्टी बनाने में 1,000 साल तक लग जाते हैं , जबकि हर 5 सेकंड में फुटबॉल मैदान के आकार की मिट्टी का कटाव हो जाता है।
मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए ग्रेट ग्रीन वॉल इनिशिएटिव के तहत 22 अफ्रीकी देश अफ्रीका की पूरी चौड़ाई में 8,000 किलोमीटर लंबी वृक्षों की दीवार का निर्माण कर रहे हैं। इस नीति का उद्देश्य 2030 तक 10 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को पुनर्स्थापित करना है।
30 से अधिक देशों ने एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अतिरिक्त, यूरोपीय संघ ने ऐतिहासिक ‘ मरम्मत का अधिकार’ कानून पारित किया है, जो निर्माताओं को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को मरम्मत योग्य बनाने के लिए बाध्य करता है ताकि वैश्विक ई-कचरे को काफी हद तक कम किया जा सके।
भारत की लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE) एक शीर्ष-स्तरीय सरकारी जनादेश है जो जमीनी स्तर पर नागरिक आंदोलनों को बढ़ावा देता है, जिसमें व्यक्तियों को पानी बचाने और प्लास्टिक कचरे को कम करने जैसी टिकाऊ दैनिक आदतों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के लक्ष्य के साथ दुनिया के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों में से एक की शुरुआत की है, जो भादला सोलर पार्क (दुनिया की सबसे बड़ी सौर स्थापना) और भारी उद्योगों को स्वच्छ बनाने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी पहलों से जुड़ा है।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 हमें याद दिलाता है कि हमारी धरती की रक्षा करना अब कोई विकल्प नहीं बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न है।
हम निष्क्रिय दर्शक से “सक्रिय संरक्षक” बन सकते हैं, क्योंकि यही एकमात्र घर हमारा है।
“जल बचाओ, जंगल बचाओ, पर्यावरण को स्वच्छ बनाओ।”

