Tuesday, April 14, 2026
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ऊना में मधुमक्खी पालन पर आयोजित हो रहा 7 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर

ऊना-शिवानी ठाकुर

ऊना जिले में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने और युवाओं व किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से बागवानी विभाग की मौन पालन इकाई, कांगड़ा द्वारा 24 से 30 मार्च तक 7 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर न केवल प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों से अवगत करा रहा है, बल्कि मधुमक्खी पालन को एक लाभकारी और स्थायी आजीविका के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि मधुमक्खियों द्वारा परागण से फसलों की उपज में 30 से 35 प्रतिशत तक वृद्धि होती है, जिससे कृषि और बागवानी दोनों क्षेत्रों में बड़ी आर्थिक वृद्धि संभव है।

उप निदेशक (बागवानी) डॉ. के. के. भारद्वाज ने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद के अलावा पराग, मधुमोम और प्रोपोलिस जैसे कई मूल्यवान उत्पाद प्राप्त होते हैं, जो अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन रहे हैं। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते शहद की मांग तेजी से बढ़ी है, जो इसे किसानों और युवाओं के लिए एक अच्छी कमाई का माध्यम बनाती है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मधु विकास योजना के माध्यम से विभाग द्वारा मौन पालकों को बड़ी आर्थिक सहायता दी जा रही है जिसमें मधुमक्खी बॉक्स (उपकरण सहित) पर लगभग 1,76,000 रुपये का अनुदान, माइग्रेशन हेतु 5,000 रुपये प्रति यूनिट, प्रोसेसिंग यूनिट पर 50 प्रतिशत अनुदान और 300 से अधिक बॉक्स रखने पर 3 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है।
डॉ. भारद्वाज ने किसानों और बागवानों से आग्रह किया कि वे अपने नजदीकी बागवानी अधिकारियों से संपर्क कर इन योजनाओं का लाभ उठाएं और मधुमक्खी पालन को स्थायी आजीविका का माध्यम बनाएं।
विषय विशेषज्ञ (मौन पालन, उत्तरी जोन कांगड़ा) डॉ. निशा मेहरा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के उत्तरी जिलों—ऊना, कांगड़ा, हमीरपुर, कुल्लू, चंबा और लाहौल—में मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। विभाग द्वारा 320 रुपये प्रति किलो की दर से प्रोसेस्ड शहद भी उपलब्ध करवाया जा रहा है।
उद्यान विकास अधिकारी (मौन पालन) डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर के दौरान मधुमक्खियों की देखभाल, रोग प्रबंधन, बॉक्स प्रबंधन, और आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है, जिससे नए और पुराने दोनों प्रकार के मौन पालक लाभान्वित हो रहे हैं।

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