Wednesday, April 15, 2026
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चैतन्य शर्मा का सुक्खू सरकार पर हमला: राष्ट्रपति से खारिज संशोधन को बताया संवैधानिक विफलता, भ्रामक प्रचार से सावधान रहने की अपील

गगरेट-दीपिक जसवाल

गगरेट के पूर्व विधायक एवं भाजयुमो प्रदेश उपाध्यक्ष चैतन्य शर्मा ने सुक्खू सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा लाया गया संशोधन संविधान और कानूनी ढांचे पर खरा नहीं उतरा, जिसके चलते उसे राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल पाई। उन्होंने इसे सरकार की बड़ी संवैधानिक विफलता बताते हुए कहा कि अब इस असफलता से ध्यान भटकाने के लिए भ्रामक शब्दों और गलत नैरेटिव के माध्यम से जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने गगरेट और हिमाचल की जनता से अपील की कि वे इस तरह के भ्रामक प्रचार से सावधान रहें और सच्चाई को पहचानें।

चैतन्य शर्मा ने स्पष्ट और सशक्त शब्दों में कहा कि एक जनप्रतिनिधि की हर एक सैलरी और पेंशन पर अधिकार केवल जनता का होता है। उनकी विधायक के रूप में प्राप्त सैलरी और पेंशन पर भी पहला और अंतिम अधिकार गगरेट की जनता का ही है, जो पहले भी जनता की सेवा में लगाया गया है और आगे भी उसी के लिए समर्पित रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई सरकार इस पर रोक लगाने का प्रयास करती है, तो वह सीधे जनता के हितों के विरुद्ध खड़ी होती है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि गरीब, जरूरतमंद और आम जनता के अधिकारों का है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने प्रदेश के आर्थिक प्रबंधन में गंभीर विफलता दिखाई है। हिमाचल भवन से जुड़े निर्णय हों या प्रदेश की वित्तीय स्थिति को कमजोर करने वाले कदम—इन सबने जनता के विश्वास को आहत किया है। उन्होंने कहा कि जो भी इन मुद्दों पर आवाज उठाता है, उसे दबाने की कोशिश की जाती है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।

चैतन्य शर्मा ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा संशोधन को मंजूरी न मिलना यह स्पष्ट संकेत है कि उसमें गंभीर संवैधानिक खामियां थीं। उन्होंने कहा कि जब पहला संशोधन ही अमान्य और अयोग्य साबित हो चुका है, तो उसी सोच को नए तरीके से फिर लाने की कोशिश यह दर्शाती है कि सरकार जनता की भावनाओं को समझने में असफल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय की टिप्पणियां भी सरकार के दृष्टिकोण पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं, विशेषकर संवैधानिक प्रावधानों में हस्तक्षेप को लेकर।

मीडिया के कुछ हिस्सों में चल रही खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कई रिपोर्ट्स तथ्यहीन और भ्रामक हैं, जिनका उद्देश्य केवल जनता को भ्रमित करना है, जबकि सच्चाई जनता के सामने है और जनता सब समझती है।

राजनीतिक संदर्भ में उन्होंने कहा कि गगरेट की जनता ने उन्हें लगभग 16,000 मतों से आशीर्वाद देकर विधानसभा भेजा था। 2022 में उन्होंने जनता की भावनाओं के अनुरूप एक सरकार को समर्थन दिया, इस विश्वास के साथ कि वह जनता के हित में कार्य करेगी। लेकिन शुरुआत से ही यह स्पष्ट हो गया कि सरकार का ध्यान जनता की अपेक्षाओं पर नहीं, बल्कि अपने निजी हितों पर अधिक केंद्रित रहा और आम लोगों के हितों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा जनता के हित को सर्वोपरि रखा है और यदि कोई भी सरकार—किसी भी दल की—जनता के विश्वास पर खरी नहीं उतरती, तो उसके खिलाफ खड़े होने का साहस भी वे रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी राजनीति के लिए नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए लिया जाता है।

उन्होंने कहा कि 2024 में अफवाहें फैलाकर, झूठे वादे कर और डर का वातावरण बनाकर जनता को गुमराह किया गया, जिसके कारण चुनावी परिणाम प्रभावित हुए। लेकिन अब पिछले कुछ वर्षों में जनता ने इन सबकी सच्चाई को पहचान लिया है और कांग्रेस के झूठे वादों के बहकावे में दोबारा आने वाली नहीं है।

अंत में चैतन्य शर्मा ने दोहराया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि संविधान, जनहित और मूल्यों की है, और जो सरकार इन पर खरी नहीं उतरती, उसे जनता समय आने पर स्वयं “अयोग्य” और “अमान्य” कर देती है।

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