वन रक्षक की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जागो वर्ड/इंदौरा- गुरमुख

एक ओर उच्चाधिकारियों ने जहाँ वन परिक्षेत्र इंदौरा में अवैध वन कटान पर अंकुश लगाने के लिए वैध रूप से होने वाले कटान की भी अनुमति खैर ठेकेदारों को नहीं देना उचित समझा तो वहीं कुछ ऐसी वन बीट हैं, जहाँ वन रक्षकों की कथित मिली भगत से अवैध रूप से वन कटान करवाया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला वन परिक्षेत्र इंदौरा के अंतर्गत मलोट में सामने आया है, जहाँ लगभग एक दर्जन के करीब खैर के पेड़ों पर आरा चलाकर तस्करी को अंजाम दिए जाने की सूचना प्राप्त हुई है। बताया जा रहा है कि उच्चाधिकारियों को बताया जाता है कि सब ठीक है, लेकिन अधिकारियों की आँखों में भी धूल झोंकी जा रही है। जबकि स्थानीय वन रक्षकों का भी हाथ इस तस्करी में शामिल है।
सूत्रों की मानें तो कुछ वन रक्षक अवैध रूप से खैर कटान की घटनाओं को अंजाम देने वाले लोगों से शाम को शराब की महफिल जमाते हैं और रात को अवैध खैर कटान की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है।

यहाँ मलोट के कुछ लोगों ने पत्रकारों को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्थानीय वन रक्षक से यदि इस बारे कोई बात करता है तो वह बदतमीजी पर उतर आता है और धमकियां तक देता है कि आपके पीछे गाँव को लोग लगा दूँगा। यक्ष प्रश्न यह है कि ऐसे कौन से गाँव वाले हैं, जिनके दम पर वन रक्षक किसी को भी धमकी देता है और कौन से ऐसे लोग हैं जो अवैध वन कटान में वन रक्षक ये साथ खड़े हैं।
यहाँ जब से आर.ओ. अब्दुल हमीद ने कार्यभार संभाला है, वो स्वयं दिन – रात गश्त पर रहते हैं, जिससे अवैध कटान पर अंकुश तो लगा है, लेकिन फिर भी कुछ वन रक्षक ऐसे हैं जो अधिकारियों को भी गलत जानकारी देते हैं और पीठ पीछे अवैध रूप से वन कटान करवाते हैं। वहीं एक पत्रकार ने भी जब मलोट बीट के वन रक्षक से अवैध रूप से हुए वन कटान बारे बात करना चाही तो उसने न केवल पत्रकार से अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि उसे धमकियां भी दी।



