Tuesday, April 14, 2026
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हिमाचल पर्यटन निगम की बैठक में ऐतिहासिक फैसले: कर्मचारियों को पदोन्नति, सुविधाओं में बड़ा सुधार

शिमला –टीना ठाकुर

हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम की 162वीं निदेशक मंडल की बैठक 24 फरवरी 2026 को आयोजित हुई, जिसमें कर्मचारियों के हित में कई महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिए गए। बैठक का सबसे अहम फैसला सफाई कर्मचारी और माली वर्ग के लिए पदोन्नति नियमों में संशोधन का रहा, जिससे वर्ष 1972 के बाद पहली बार इन वर्गों को पदोन्नति के अवसर मिलेंगे। यह कदम कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें उनके कार्य के अनुरूप सम्मान भी दिलाएगा। इस निर्णय को कर्मचारी हितैषी नेतृत्व का परिणाम माना जा रहा है।
बैठक में चतुर्थ श्रेणी के “Utility Worker” पद का नाम बदलकर “Multi Task Worker (MTW)” करने का निर्णय भी लिया गया, जिससे कर्मचारियों की पहचान और गरिमा को नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही निगम की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए फ्लाइंग स्क्वाड के गठन और 24×7 कॉल सेंटर स्थापित करने का फैसला लिया गया, जिससे पर्यटकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
निगम की परिसंपत्तियों के जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण पर भी विशेष जोर दिया गया। शिमला स्थित होटल हॉलिडे होम पर लगभग 45 करोड़ रुपये और हमीरपुर के होटल हमीर पर करीब 22 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं, एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से कुल्लू जिले की प्रमुख इकाइयों—होटल नग्गर कैसल, होटल सिल्वर मून, हिडिंबा कॉटेज और होटल मनालसू—का कार्य भी प्रगति पर है।
कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जीर्णोद्धाराधीन इकाइयों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन संबंधी मामलों को सरकार के समक्ष उठाने का निर्णय भी लिया गया। हालांकि, कर्मचारी संघ ने निगम की बढ़ती वित्तीय देनदारियों, लंबित डीए एरियर, नए वेतनमान के एरियर और वेतन भुगतान में देरी पर चिंता जताई है। साथ ही विभिन्न होटलों में प्रबंधकीय पदों की रिक्तियों को शीघ्र भरने की मांग भी की गई है।
कर्मचारी संघ ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि निगम की परिसंपत्तियों को निजी हाथों में देने के बजाय स्वयं निगम द्वारा संचालित किया जाए। संघ का मानना है कि निगम के पास अनुभवी और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हैं, जो न केवल आर्थिक मजबूती प्रदान करेंगे बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाएंगे। “अतिथि देवो भव:” की भावना के साथ कार्य कर रहे कर्मचारी प्रदेश की आतिथ्य परंपरा को सुदृढ़ बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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