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अस्पतालों द्वारा थोक मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर मेडिकल डिवाइस और कंज्यूमेबल्स बेचे जाने से मरीजों की जेब पर भारी बोझ बढ़ रहा है।जब हम अस्पताल में इलाज कराते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान डॉक्टर की फीस, बेड चार्ज और महंगी दवाइयों पर जाता है। लेकिन अस्पताल के बिल का एक ऐसा हिस्सा भी होता है, जिस पर आमतौर पर किसी की नजर नहीं जाती और वह है इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाले कन्वेएबल्स और मेडिकल डिवाइसेज यानी सिरिंज, आईवी सेट और दिल के ऑपरेशन में लगने वाले उपकरण।

कुल मिलाकर अस्पताल के भारी-भरकम बिलों का एक ऐसा छिपा हुआ और चौंकाने वाला सच सामने आया है, जो सीधे तौर पर आम मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहा है।इस बात को ऐसे समझिए कि थोक बाजार में महज 11 रुपये में मिलने वाला आईवी (IV) इन्फ्यूजन सेट अस्पतालों में 325 रुपये की भारी-भरकम एमआरपी पर बेचा जा रहा है, जबकि 7 रुपये से कम की डिस्पोजेबल सिरिंज का दाम करीब 60 रुपये वसूला जाता है। यही नहीं, पेसमेकर और हार्ट वाल्व जैसे जीवनरक्षक हाई-एंड मेडिकल उपकरणों पर तो यह मुनाफा आयात मूल्य से 10 से 30 गुना तक अधिक होता है।
