सोलन /स्वस्तिक गौतम

हिमाचल प्रदेश के फ़ार्मा उद्योग आज गंभीर चुनौतियों और मजबूरियों से गुजर रहे हैं। प्रदेश की फार्मा इकाइयाँ दिन-रात कठिन परिस्थितियों में कार्य कर रही हैं, लेकिन जटिल कानूनी प्रक्रियाओं और अनावश्यक प्रशासनिक दबाव के कारण विशेषकर लघु एवं मध्यम उद्योग बंद होने के कगार पर खड़े हैं।
यह बात ठाकुर हरिओम सिंह, सह संयोजक, औद्योगिक प्रकोष्ठ, जिला सोलन, भारतीय जनता पार्टी ने कही। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सरकार और प्रशासन ने फ़ार्मा कंपनियों का सहयोग नहीं किया, तो आने वाले समय में प्रदेश की अनेक औद्योगिक इकाइयाँ बंद हो सकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी बढ़ेगी और हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुँचेगा।
ठाकुर हरिओम सिंह ने कहा कि फ़ार्मा उद्योग हिमाचल प्रदेश की आर्थिक रीढ़ है। जब उद्योग चलेंगे, तभी रोज़गार के अवसर सृजित होंगे और प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इसके लिए आवश्यक है कि सरकार, प्रशासन और फ़ार्मा कंपनियाँ आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।
उन्होंने “इंस्पेक्टर राज” जैसी कार्यप्रणाली पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ अधिकारियों का रवैया उद्योगों के प्रति सहयोगात्मक न होकर दमनकारी है, जो प्रदेश के औद्योगिक विकास में बाधा बन रहा है। अधिकारियों को चाहिए कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में आए बिना निष्पक्ष रूप से कार्य करें और उद्योगों को आगे बढ़ाने तथा रोज़गार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में सोचें।
उन्होंने अपील की कि सरकार और प्रशासन फ़ार्मा उद्योगों की समस्याओं को गंभीरता से समझे और उन्हें समाधान प्रदान करे, ताकि हिमाचल प्रदेश और यहाँ का औद्योगिक विकास एक साथ आगे बढ़ सके।

