भारत भूषण

बाबा बाल जी के आश्रमों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
ऊना 08 फरवरी (भारत भूषण)
संत बाबा बाल जी महाराज आश्रम की सेवा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे अरनियाला निवासी श्री किशोर चंद सैनी आज समर्पण, सेवा और श्रद्धा की मिसाल बन चुके हैं। लगभग 70 वर्षीय किशोर चंद सैनी वर्ष 2015 में पंजाब पुलिस से एएसआई पद से सेवानिवृत्त हुए थे और तभी से संत बाबा बाल जी महाराज की आज्ञा का पालन करते हुए आश्रम सेवा में निरंतर जुटे हुए हैं।
सेवानिवृत्ति के मात्र एक महीने बाद ही संत बाबा बाल जी ने उन्हें आश्रम सेवा के लिए बुलावा भेजा। महाराज की आज्ञा को शिरोधार्य करते हुए किशोर चंद जी ने पूरी निष्ठा के साथ सेवा का मार्ग चुन लिया। वर्तमान में उनके कंधों पर संत बाबा बाल जी द्वारा संचालित 14 राधा-कृष्ण आश्रमों की देखरेख की अहम जिम्मेदारी है, जिनमें कोटला कलां, वृंदावन धाम और ऋषिकेश के प्रमुख आश्रम शामिल हैं।
आश्रमों की व्यवस्था बनाए रखना, आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ध्यान रखना, साधु-संतों और गणमान्य अतिथियों के स्वागत से लेकर विदाई तक की संपूर्ण व्यवस्था संभालना — ये सभी जिम्मेदारियां किशोर चंद सैनी पूरी तत्परता और विनम्रता से निभा रहे हैं। उनके मधुर व्यवहार और सरल स्वभाव के कारण श्रद्धालु भी उनसे विशेष आत्मीयता महसूस करते हैं।
विशेष बात यह भी है कि किशोर चंद सैनी और संत बाबा बाल जी बचपन में सहपाठी रहे हैं। दोनों ने कोटला प्राइमरी स्कूल की पहली कक्षा से तीसरी तक साथ पढ़ाई की। उस समय हाकिमी देवी उनकी अध्यापिका थीं। किशोर जी बताते हैं कि महाराज जी बचपन से ही भक्ति भाव में लीन रहते थे और छोटी उम्र में भी लोग उनके पास अपने प्रश्न लेकर आते थे। तीसरी कक्षा के बाद बाबा बाल जी ने औपचारिक शिक्षा छोड़ दी, जबकि किशोर जी आगे पढ़कर पुलिस सेवा में चले गए।
पारिवारिक जीवन की बात करें तो किशोर चंद जी के माता-पिता का स्वर्गवास हो चुका है। उनकी एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है। अब वे और उनकी पत्नी — जो बाल बाड़ी में सुपरवाइजर रह चुकी हैं — दोनों पेंशनधारक हैं और अपना शेष जीवन बाबा जी के सानिध्य में भक्ति व सेवा को समर्पित करना चाहते हैं।
किशोर चंद सैनी का कहना है कि उन्हें अपने साथी सेवादारों श्री विशंभर जी और श्री टेकचंद जी का भी व्यवस्था बनाए रखने में पूरा सहयोग मिलता है। वे संत बाबा बाल जी को करुणामयी संत बताते हुए कहते हैं कि उनके दरबार से कोई भक्त खाली नहीं जाता। वे स्वयं को अत्यंत भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें महाराज जी की शरण में सेवा का अवसर मिला।
आज किशोर चंद सैनी न केवल आश्रम प्रबंधन की मजबूत कड़ी हैं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और समर्पण की जीवंत मिसाल बनकर अनेक भक्तों को प्रेरित भी कर रहे हैं|

