बंगाणा-जोगिंद्र देव आर्य

हटली क्लब में चल रही शिव महा पुराण कथा के सातवें दिवस पर गणेश व कार्तिकेय जन्म प्रसंग का वर्णन, डॉ अमीषा और सुमिती ने की पूजा-अर्चना,
कथा व्यास आचार्य तरुण डोगरा बोले, शिव महापुराण केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि मोक्ष का है द्वार,
बंगाणा,उपमंडल बंगाणा के श्री राम नाटक क्लब हटली में चल रही शिव महापुराण कथा का सातवां दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। कथा के सातवें दिन कथा व्यास आचार्य श्री श्री तरुण डोगरा जी ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के पश्चात भगवान श्री गणेश और भगवान कार्तिकेय के जन्म से जुड़े पावन प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और भगवान शिव की महिमा का श्रवण कर भाव-विभोर हो गए। कथा व्यास आचार्य तरुण डोगरा जी ने अपने प्रवचनों में बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के बाद संसार की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए भगवान गणेश ब भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ। उन्होंने भगवान श्री गणेश के जन्म की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि माता पार्वती ने अपने उबटन से भगवान गणेश की रचना की और उन्हें अपने द्वार की रक्षा का आदेश दिया। जब भगवान शिव वहां पहुंचे और गणेश जी ने उन्हें भीतर जाने से रोका, तब भगवान शिव ने क्रोध में आकर उनका मस्तक अलग कर दिया। बाद में माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने हाथी का मस्तक लगाकर गणेश जी को पुनर्जीवित किया और उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। इसी प्रकार कथा व्यास आचार्य तरुण डोगरा जी ने भगवान कार्तिकेय के जन्म का भी वर्णन करते हुए बताया कि स्वामी कार्तिकेय का जन्म देवताओं की रक्षा और असुरों के विनाश के लिए हुआ था। उन्होंने कहा कि भगवान कार्तिकेय ने अपने साहस और पराक्रम से तारकासुर जैसे दैत्यों का संहार कर देवताओं को भयमुक्त किया। इन कथाओं के माध्यम से आचार्य तरुण डोगरा जी ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि जीवन में धर्म, साहस और कर्तव्य का पालन करना ही सच्ची भक्ति है।
कथा के दौरान आचार्य तरुण डोगरा जी ने कहा कि शिव महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के जीवन को सही दिशा देने वाला और मृत्यु के बाद मोक्ष का द्वार खोलने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ शिव महापुराण का श्रवण करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और उसे आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में सदाचार, सेवा और भक्ति को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं। सातवें दिवस की कथा में क्षेत्र के विख्यात समाजसेवी रूमेल कुमार के परिवार ने विशेष रूप से भाग लिया। समाज सेवी रूमेल कुमार की सुपुत्री डॉ. अमीषा जो चंडीगढ़ के फोर्टीज अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रही हैं, तथा उनकी छोटी सुपुत्री सुमिती, जो वर्तमान में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं, दोनों बेटियों ने विधिवत पूजा-अर्चना करवाई। इस अवसर पर उन्होंने श्री राम नाटक क्लब हटली को 7100 रुपये की राशि दान स्वरूप भेंट की, जिसे क्लब पदाधिकारियों ने श्रद्धा और आभार के साथ स्वीकार किया। इस मौके पर यह भी उल्लेखनीय रहा कि समाजसेवी रूमेल कुमार एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मधु रानी लंबे समय से श्री राम नाटक क्लब हटली के स्थायी सदस्य हैं। वह दोनों क्लब की प्रत्येक धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधि में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। बताया गया कि दोनों पति-पत्नी ने समय-समय पर क्लब की गतिविधियों में लाखों रुपये का सहयोग देकर क्षेत्र में धार्मिक आयोजनों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। उन की समाजसेवा और धार्मिक आस्था क्षेत्र में एक प्रेरणा के रूप में देखी जाती है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के भजनों पर भक्ति भाव से सहभागिता निभाई और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। कथा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। क्लब के प्रधानंदन सोनी एवं स्थानीय पंचायत के उपप्रधान सुरेन्द्र हटली ने बताया कि शिव महापुराण कथा के आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में धार्मिक जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं को विशाल भंडारे का भी प्रसाद वितरित किया गया और सभी ने भगवान शिव से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। क्लब के सदस्यों ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्रवासियों के सहयोग से ही इस प्रकार के धार्मिक आयोजन सफल हो पाते हैं। उन्होंने सभी से आगामी दिनों की कथा में भी अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की। इस मौके पर क्लब के महासचिव संजय सोनी किशन दत्त शास्त्री कमलदेव शास्त्री विवेकशील शर्मा सुरेन्द्र राणा ओम प्रकाश सोनी राज कुमार धीमान मदन गोपाल शर्मा किशन देव शर्मा बबीता साईं समर धीमान ज्योति वर्ज़ाता हंसराज वर्ज़ाता अंकुश वर्ज़ाता राकेश कुमार जितेंद्र सिंह नीलम सोनी आदि सभी सदस्यों ने अपनी भरपूर सेवाएं प्रदान की।
