[ऊना] पलोह–अविनाश/ स्पर्श

पलोह में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और परम श्रद्धेय भागवताचार्य अतुल कृष्ण जी महाराज के अमृतमय प्रवचनों का श्रवण कर जीवन को सही दिशा देने वाले संदेश प्राप्त किए। कथा के दौरान महाराज श्री ने मनुष्य जीवन में अंतर्यात्रा के महत्व को विस्तार से समझाते हुए कहा कि सच्ची सफलता बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आत्मा की खोज में निहित है। भागवताचार्य अतुल कृष्ण जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि मनुष्य के जीवन में दो प्रकार की यात्राएं संभव हैं—एक बहिर्यात्रा और दूसरी अंतर्यात्रा। उन्होंने कहा कि बहिर्यात्रा वह है जिसमें मनुष्य बाहर की वस्तुओं और सुख-सुविधाओं की खोज में भटकता रहता है, लेकिन उसका वास्तविक गंतव्य कभी प्राप्त नहीं हो पाता। इसके विपरीत अंतर्यात्रा वह है, जो मनुष्य को स्वयं के भीतर झांकने की प्रेरणा देती है और पहले ही कदम पर सफलता का अनुभव कराती है। उन्होंने समझाया कि जिसे मनुष्य बाहर खोज रहा है, वह वास्तव में उसके भीतर ही मौजूद है। उसे पाने के लिए केवल अपने भीतर के अज्ञान का पर्दा हटाना आवश्यक है। महाराज श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे धूल हटाने से दर्पण स्वच्छ हो जाता है और उसमें वस्तुएं स्पष्ट दिखाई देने लगती हैं, उसी प्रकार जब मनुष्य अपने मन के विकारों को दूर कर लेता है तो उसके भीतर जीवन का सत्य स्वयं प्रकट होने लगता है। इस सत्य को कोई परमात्मा कहता है, कोई निर्वाण, कोई कैवल्य और कोई मोक्ष, लेकिन उसका मूल उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और आत्मज्ञान की प्राप्ति है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को दूसरों की बातों से प्रभावित होने के बजाय स्वयं की आत्मा को पहचानने का प्रयास करना चाहिए।

अपने प्रवचनों के दौरान भागवता चार्य ने यह भी कहा कि मनुष्य की सामर्थ्य सीमित हो सकती है, लेकिन परमात्मा की कृपा असीम होती है। उन्होंने कहा कि संसार में कोई व्यक्ति किसी को अच्छा कहता है, कोई बुरा कहता है, कोई सम्मान देता है तो कोई अपमान करता है, लेकिन इन बातों से मनुष्य का वास्तविक स्वरूप नहीं बदलता। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि मनुष्य जैसा भी है, वह परमात्मा को प्रिय है और उसे केवल अपने कर्मों को शुद्ध बनाने की आवश्यकता है। संसार की आलोचना या प्रशंसा से प्रभावित हुए बिना ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलना ही जीवन की सच्ची सफलता है। कथा के चतुर्थ दिवस पर भगवान के विभिन्न दिव्य अवतारों का वर्णन भी बड़े ही भावपूर्ण ढंग से किया गया। इस दौरान वामन अवतार, मत्स्य अवतार, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अवतार तथा भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया गया।श्रद्धालुओं ने इन दिव्य प्रसंगों का अत्यंत श्रद्धा और ध्यानपूर्वक श्रवण किया। कथा के दौरान जब भगवान के अवतारों की महिमा का वर्णन किया गया, तो श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं और पूरा वातावरण भक्ति रस में सराबोर हो गया। कथा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हो रहा है। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैठने, पेयजल और स्वच्छता की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की जा रही है, जिससे श्रद्धालु भक्ति के साथ-साथ सेवा का भी लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर कथा के मुख्य यजमान किशन देव शर्मा, अमित शर्मा, सुखदेव सिंह सुरयाल, विपन ठाकुर, प्रधानाचार्य तरसेम धीमान, सूबेदार अवतार सिंह, हवलदार विजय कुमार, रमेश शर्मा, राकेश शर्मा, अभिषेक शर्मा, सृजन शर्मा, सुदर्शना कुमारी, अनुराधा शर्मा, मीनू शर्मा, रेणु भारद्वाज, सुमन ठाकुर, रजनी ठाकुर, अनुराधा गर्ग, ममता शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया और आयोजन की सराहना की।
श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के इस भव्य आयोजन से पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालु प्रतिदिन बड़ी संख्या में कथा स्थल पर पहुंचकर भगवान की महिमा का श्रवण कर रहे हैं। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा का लाभ उठाएं और अपने जीवन को धर्म एवं भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करें।

