Wednesday, April 15, 2026
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लेबर कोड के विरोध में हिमाचल में ‘काला दिवस’, मजदूरों का प्रदेशभर में प्रदर्शन

शिमला-टीना ठाकुर

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और राष्ट्रीय फेडरेशनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर CITU के बैनर तले हिमाचल प्रदेश के मजदूरों ने मजदूर विरोधी चार लेबर कोड के खिलाफ प्रदेशव्यापी ‘काला दिवस’ मनाया। इस दौरान कार्यस्थलों, ब्लॉक और जिला मुख्यालय स्तर पर जोरदार प्रदर्शन आयोजित किए गए तथा देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi को अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर इन लेबर कोड को रद्द करने की मांग उठाई गई।
राजधानी शिमला के डीसी ऑफिस में हुए प्रदर्शन में सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, सचिव बालक राम, जिला सचिव रमाकांत मिश्रा सहित विवेक कश्यप, पूर्ण चंद, वीरेंद्र लाल, दलीप सिंह, ओमप्रकाश, दर्शन लाल, राकेश सलमान, विद्या, निशा, उमा, चम्पा और सुरेंद्रा सहित कई मजदूर नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों पर तीखा हमला बोला।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि इन लेबर कोड के लागू होने से करीब 70 प्रतिशत उद्योग और 74 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। हड़ताल करने पर मजदूरों के लिए कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जबकि स्थायी रोजगार के बजाय ठेका प्रथा और फिक्स टर्म रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही कार्य के घंटे आठ से बढ़ाकर बारह करने की बात को उन्होंने “बंधुआ मजदूरी की ओर कदम” करार दिया।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा लाई जा रही चारों श्रम संहिताएं श्रमिकों के अधिकारों पर गंभीर आघात हैं और दशकों के संघर्ष से हासिल श्रम कानूनों को कमजोर कर रही हैं। इससे नौकरी की सुरक्षा, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियन अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि इन चारों श्रम संहिताओं को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और मौजूदा श्रम कानूनों को मजबूत किया जाए। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने, ठेका प्रथा पर नियंत्रण लगाने, स्थायी रोजगार को बढ़ावा देने, सभी श्रमिकों को ईपीएफ, ईएसआई, पेंशन व ग्रेच्युटी जैसी सामाजिक सुरक्षा देने और ट्रेड यूनियन अधिकारों की रक्षा करने की भी मांग उठाई गई। इसके अलावा निजीकरण और विनिवेश की नीतियों पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा गया कि इससे रोजगार के अवसर घट रहे हैं और श्रमिकों का शोषण बढ़ रहा है।

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