जागो! ऊना , ब्यूरो रिपोर्ट


रक्कड़ कॉलोनी, ऊना में आज खुले निरंकारी संत समागम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। समागम में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से पधारे आदरणीय सुरेन्द्र नाथ त्रिपाठी जी ने अपने आध्यात्मिक विचारों द्वारा संगत को लाभान्वित किया।

उन्होंने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की पावन शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रह्मज्ञान के बिना जीवन की वास्तविक मुक्ति संभव नहीं है। जब मनुष्य समय के सतगुरु की शरण में जाकर ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति करता है, तभी उसे परमात्मा का यथार्थ बोध होता है और उसके जीवन से अज्ञानता तथा भ्रम का अंधकार दूर हो जाता है।
इस अवसर पर श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक “श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः” (गीता 4.39) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रद्धावान व्यक्ति ही ज्ञान को प्राप्त करता है। सच्ची श्रद्धा और समर्पण के साथ सतगुरु द्वारा प्रदान किए गए ब्रह्मज्ञान को जीवन में अपनाकर आत्मिक शांति एवं जीवन-मुक्ति प्राप्त की जा सकती है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि निरंकारी मिशन मानवता, प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश देता है। ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर मनुष्य अपने जीवन में नम्रता, सहनशीलता और सेवा जैसे गुणों को अपनाता है, जिससे उसका जीवन सार्थक बनता है तथा समाज में प्रेम और सद्भाव का वातावरण स्थापित होता है।
समागम का समापन “धन निरंकार” के जयघोष के साथ हुआ।

