आखिर कहाँ जा रहा करोड़ों का पैसा: प्रेम सिंह औजला
दैनिक जागो वर्ल्ड ! हरोली , ब्यूरो रिपोर्ट

चुनावी वायदों और बजट घोषणाओं के उलट धरातल पर मात्र ₹40 प्रति किलो बिक रहा गाय का दूध।हरोली के पूर्व प्रधान एवं जनजातीय विकास विभाग के सदस्य ने मुख्यमंत्री, पशुपालन मंत्री व मिल्कफेड डायरेक्टर को पत्र लिख उठाए गंभीर सवाल।
हरोली विधानसभा क्षेत्र के तहत आते ग्राम भदौड़ी के निवासी, जनजातीय विकास विभाग हरोली के सदस्य, पूर्व प्रधान एवं पूर्व बीडीसी (BDC) सदस्य प्रेम सिंह औजला ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार और मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक (डायरेक्टर) को वीरवार को एक कड़ा पत्र भेजकर प्रदेश के लाखों दूध उत्पादक किसानों की समस्याओं और बदहाली को प्रमुखता से उठाया है। औजला ने सरकार को उनके चुनावी वायदे याद दिलाते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते धरातल पर सुधार न हुआ, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।
बजट की घोषणाएं कागजी, धरातल पर किसान परेशान
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में प्रेम सिंह औजला ने कहा कि सत्ता में आने से पूर्व कांग्रेस सरकार ने जनता से वायदा किया था कि गाय का दूध ₹80 और भैंस का दूध ₹100 प्रति किलो की दर से खरीदा जाएगा। इसके बाद हाल ही के बजट में सरकार ने गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹61 प्रति किलो घोषित किया। लेकिन धरातल पर सच्चाई बेहद कड़वी है। आज भी ग्रामीण स्तर की डेयरियों पर 4 फैट और 8.50 SNF वाले उच्च गुणवत्ता के गाय के दूध की कीमत मात्र ₹40 प्रति किलो दी जा रही है। औजला ने तीखा सवाल दागते हुए पूछा कि आखिर सरकार द्वारा ढिंढोरा पीटी गई वह MSP धरातल से कहाँ गायब हो गई?

मिल्क सेस के पैसे पर उठाए बड़े सवाल
प्रेम सिंह औजला ने प्रदेश सरकार द्वारा वसूले जा रहे ‘मिल्क सेस’ पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार जनता की जेब से दूध के नाम पर लगातार ‘मिल्क सेस’ वसूल रही है, लेकिन दूसरी तरफ इस योजना का कोई भी लाभ सीधे तौर पर उत्पादक किसानों तक नहीं पहुँच रहा है। उन्होंने पूछा कि आखिर मिल्क सेस के माध्यम से इकट्ठा हो रहा करोड़ों रुपया जा तो जा कहाँ रहा है? यदि यह पैसा किसानों के कल्याण और उन्हें दूध का सही मूल्य देने पर खर्च नहीं हो रहा, तो इस सेस को वसूलने का क्या औचित्य है?
लागत बढ़ी, पशु बेचने और फैक्ट्रियों में भागने को मजबूर हुए युवा
औजला ने कहा कि आज पशुपालन व्यवसाय गहरे संकट में है। निरंतर पशु आहार (फीड), खल, तारामीरा, मिनरल मिक्सचर और दवाइयों के दाम आसमान छू रहे हैं। लागत दोगुनी-तिगुनी हो चुकी है, परंतु दूध का दाम पिछले लंबे समय से मात्र ₹40 पर अटका हुआ है। इस घाटे के कारण लोग अपने दुधारू पशुओं को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं। युवाओं का पुश्तैनी डेयरी व्यवसाय छोड़कर फैक्ट्रियों में कम वेतन पर मजदूरी के लिए भागना उनकी मजबूरी बन चुका है। यदि सरकार घोषित MSP पर दूध खरीदना शुरू कर दे, तो युवाओं को विदेशों में धक्के खाने की नौबत नहीं आएगी और प्रदेश में बेरोजगारी का ग्राफ तेजी से नीचे गिरेगा।
अधिकारियों की शिथिलता पर जताई नाराजगी
पूर्व प्रधान ने बताया कि वह कुछ महीने पहले भी स्वयं मुख्यमंत्री और पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार के संज्ञान में यह मामला ला चुके हैं। उस समय मुख्यमंत्री ने मिल्कफेड के डायरेक्टर को पत्र लिखकर समाधान के निर्देश दिए थे, परंतु अधिकारी वर्ग की लापरवाही के चलते आज तक धरातल पर कोई हल नहीं निकला।
’डेढ़ साल बचा है, अब तो वायदे पूरे करे सरकार’
प्रेम सिंह औजला ने मुख्यमंत्री को दो-टूक शब्दों में कहा कि वर्तमान सरकार का कार्यकाल अब केवल डेढ़ साल शेष बचा है। जनता और किसान अभी भी आस लगाए बैठे हैं। आपके पास अभी भी समय है कि आप अपने किए गए वायदों को ईमानदारी से पूरा करें और मिल्कफेड को सख्त निर्देश जारी कर बजट में घोषित ₹61 की MSP दर तुरंत प्रभाव से ग्रामीण स्तर की डेयरियों पर लागू करवाएं।

