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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर गरमाई सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए दोटूक कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों ही देश के गौरव और सम्मान के प्रतीक हैं, ऐसे में इनकी आपस में तुलना कर राजनीतिक विवाद खड़ा करने वालों को माफी मांगनी चाहिए।मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू पर भाजपा विधायक दल की ओर से राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाए जाने और माफी की मांग के बाद, अब मंत्री धर्माणी ने मोर्चा संभालते हुए भाजपा पर जोरदार पलटवार किया है।मंत्री धर्माणी ने स्पष्ट किया कि विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद सभी सदस्यों का सावधान मुद्रा में खड़ा होना पूरी तरह स्वाभाविक था। भाजपा विधायकों की ओर से सदन की शुरुआत राष्ट्रगान के बजाय राष्ट्रगीत से किए जाने के दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि संसद से पारित किसी भी कानून या अधिसूचना में ऐसा कोई बाध्यकारी निर्देश नहीं है कि विधानसभा में पहले राष्ट्रगान ही गाया जाना अनिवार्य है। यह पूरी तरह से सदन की परंपरा और व्यवस्था पर निर्भर करता है, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष अपना स्पष्ट निर्णय दे चुके हैं।भाजपा पर राष्ट्रवाद के नाम पर कोरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए धर्माणी ने कहा कि विपक्षी दल देश और प्रदेश के गंभीर मामलों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सुनियोजित तरीके से ऐसे विवाद पैदा कर रहा है। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और जमीनों की खरीद में कथित धांधलियों का जिक्र करते हुए देशभर में युवाओं के आक्रोश का केंद्र बने नीट (NEET) पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया।इसके अलावा हिमाचल में पुलिस और जेबीटी भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इन पर नकेल कसने के लिए ही पूर्व आयोग को बंद कर पारदर्शी व्यवस्था कायम की है, जिससे बौखलाकर भाजपा अब ‘वंदे मातरम्’ को लेकर अनावश्यक तूल दे रही है।
