ऊना/हरौली-ब्यूरो रिपोर्टर

हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस पार्टी सरकार द्वारा प्रस्तुत ताज़ा बजट न केवल जन-विरोधी है, बल्कि यह प्रदेश की जनता के साथ खुला विश्वासघात और उनके सपनों पर सीधा प्रहार है। यह बजट पूरी तरह से दिशाहीन, दूरदृष्टि-विहीन और केवल कागजी घोषणाओं का पुलिंदा साबित हुआ है, जिसमें न नीति है, न नीयत और न ही विकास की कोई ठोस प्रतिबद्धता दिखाई देती है।
प्रदेश की जनता ने जिस विश्वास के साथ कांग्रेस पार्टी को सत्ता सौंपी थी, यह बजट उस विश्वास को चकनाचूर करने वाला है। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि सरकार को न किसानों की चिंता है, न युवाओं की, न कर्मचारियों की और न ही व्यापारियों की।
किसानों के साथ छल:
प्रदेश का किसान आज महंगाई, बढ़ती लागत और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है, लेकिन इस बजट में किसानों के लिए कोई ठोस राहत, सब्सिडी या नई प्रभावी योजना नहीं दी गई। यह सरकार किसानों को केवल वादों और घोषणाओं के सहारे छोड़ देना चाहती है।
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़:
हिमाचल का युवा बेरोजगारी की मार झेल रहा है, लेकिन इस बजट में रोजगार सृजन को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। केवल आंकड़ों और खोखले दावों के माध्यम से युवाओं को गुमराह करने का प्रयास किया गया है। यह बजट युवाओं के सपनों को कुचलने वाला है।
मध्यम वर्ग और गरीब पर आर्थिक बोझ:
महंगाई पहले ही चरम पर है, और इस बजट के माध्यम से अप्रत्यक्ष करों और शुल्कों में बढ़ोतरी कर आम जनता की जेब पर और अधिक बोझ डालने की साजिश रची गई है। यह बजट गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ने वाला साबित होगा।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की अनदेखी:
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। यह वर्ग जो प्रदेश की रीढ़ है, उसे इस बजट में कोई सम्मान या राहत नहीं दी गई।
विकास कार्यों में ठहराव:
प्रदेश के बुनियादी ढांचे, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कोई बड़ा विजन या ठोस योजना नजर नहीं आती। यह बजट विकास को गति देने के बजाय उसे रोकने वाला साबित होगा।
भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट मानना है कि यह बजट केवल राजनीतिक दिखावा है, जिसका उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाना और अपनी विफलताओं को छिपाना है।
हम कांग्रेस पार्टी सरकार से पूछना चाहते हैं कि—
क्या यही है उनका “विकास मॉडल”?
क्या जनता को केवल झूठे वादों और खोखली घोषणाओं से ही बहलाया जाएगा?
क्या युवाओं, किसानों और गरीबों की कोई चिंता इस सरकार को नहीं है?
यह बजट हिमाचल प्रदेश की जनता के हितों के खिलाफ है और इसे तुरंत वापस लेकर पुनर्विचार किया जाना चाहिए

