दैनिक जागो वर्ल्ड ऊना

ऊना। प्रदेश में बढ़ती मिलावटखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए हिमाचल सरकार को खाद्य जांच व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। खाद्य पदार्थों में मिलावट केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। दूध, घी, पनीर, मावा, खाद्य तेल, मसाले, मिठाइयों सहित अन्य खाद्य पदार्थों की जांच समयबद्ध तरीके से होना जरूरी है।
पूर्व जिला परिषद सदस्य, पंकज सहोड़ ने कहा कि हिमाचल जैसे भौगोलिक रूप से विस्तृत प्रदेश में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को केवल सीमित प्रयोगशालाओं पर निर्भर नहीं रखा जा सकता। प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से युक्त अतिरिक्त Food Testing Laboratories स्थापित करने के साथ जिला स्तर पर मजबूत सैंपल कलेक्शन और जांच व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ऊना-कांगड़ा और शिमला क्षेत्रों में अत्याधुनिक खाद्य जांच सुविधाएं विकसित की जाएं, ताकि खाद्य नमूनों को जांच के लिए दूर भेजने में लगने वाला समय कम हो और रिपोर्ट शीघ्र प्राप्त हो सके। इससे मिलावटखोरों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
पंकज सहोड़ ने सरकार से मांग की कि पिछले वर्षों में प्रदेश तथा प्रत्येक जिले से लिए गए खाद्य नमूनों, फेल हुए नमूनों और दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का वर्षवार एवं जिलावार आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए। जनता को यह जानने का अधिकार है कि कितने नमूने लिए गए, कितने जांच में फेल हुए और उनके आधार पर क्या कार्रवाई की गई।
उन्होंने कहा कि केवल सैंपल लेना पर्याप्त नहीं है। उसकी वैज्ञानिक जांच, समय पर रिपोर्ट और दोषी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई—पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाना चाहिए। रिपोर्ट आने में महीनों लगने से मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई का उद्देश्य कमजोर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को मौजूदा प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने के साथ आधुनिक उपकरण, पर्याप्त वैज्ञानिक एवं तकनीकी स्टाफ और तेज रिपोर्टिंग की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही सैंपल लेने से लेकर लैब रिपोर्ट और अंतिम कार्रवाई तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जानी चाहिए।
पंकज सहोड़ ने कहा कि मिलावटखोरी करने वालों के लिए कानून का डर और आम जनता के लिए सुरक्षित भोजन—दोनों जरूरी हैं। बार-बार मिलावट करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, भारी आर्थिक दंड तथा गंभीर मामलों में सख्त सजा का प्रभावी प्रावधान होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के साथ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं होनी चाहिए। सरकार खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रदेश के लोगों को सुरक्षित, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ मिल सकें।
