Saturday, June 13, 2026
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खाने की थाली, बर्गर, समोसा… हर चीज पर ओवरचार्जिंग, जनता की कट रही जेब

जिला कांगड़ा में महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है।

जागो! कांगड़ा ,राकेश कुमार

जिला कांगड़ा में महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। स्थिति यह है कि प्रशासन द्वारा अप्रैल महीने में खाद्य पदार्थों की जो रेट लिस्ट जारी की गई थी, उसे धता बताते हुए कारोबारी अब मनमाने दाम वसूल रहे हैं। जिलेभर में 90 रुपये में मिलने वाली भर पेट थाली के लिए ग्राहकों से 100 से लेकर 140 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।धर्मशाला, पालमपुर, कांगड़ा में केवल थाली ही नहीं, अन्य खाद्य सामग्री के दाम भी 10 से 20 रुपये तक बढ़ा दिए गए हैं। सरकारी दरों के अनुसार बकरे का मीट 550 रुपये प्रति किलो तय है, लेकिन बाजारों में यह 600 रुपये किलो बिक रहा है। ढाबा संचालकों का तर्क है कि परिवहन खर्च, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और व्यावसायिक सिलिंडर के दाम बढ़ने के कारण वे दाम बढ़ाने को मजबूर हैं। बर्गर, समोसा और टिक्की जैसे स्नैक्स के दामों में भी 10-10 रुपये की बढ़ोतरी देखी जा रही है।महंगाई की इस मार से ग्राहक खासे परेशान हैं। ग्राहकों का कहना है कि प्रशासन के तय रेट्स सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। इस संदर्भ में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अफसरों का कहना है कि विभाग निरंतर निरीक्षण कर रहा है। यदि कोई कारोबारी अधिक दाम वसूलता है, तो ग्राहक बिल जरूर मांगें। विभाग को शिकायत मिलने पर तुरंत निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी।रिपोर्ट के अनुसार, कांगड़ा जिले में कुल 16 खाद्य निरीक्षकों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से तीन पद अभी भी खाली चल रहे हैं (रैत, भेडू महादेव और कांगड़ा)। फिलहाल इन क्षेत्रों का अतिरिक्त कार्यभार अन्य निरीक्षकों को सौंपा गया है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में जिले में कुल 2028 निरीक्षण किए गए और पॉलीथिन व अन्य अनियमितताओं के तहत 1,03,754 रुपये की सिक्योरिटी जमा करवाई गई है।

कारोबारियों का तर्क…सिलिंडर के दाम बढ़ने से बढ़ानी पड़ी कीमतें जीप मालिकों ने बकरे ढोने का किराया 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,400 से 1,500 रुपये के बीच कर दिया है। इससे मीट के दाम बढ़ाना हमारी मजबूरी बन गई है। -भीम सिंह, मीट विक्रेता पिछले 15 दिनों में कमर्शियल सिलिंडर के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। जब सिलिंडर सस्ता था, तब हम ग्राहकों से कम दाम लेते थे। अब बढ़ती लागत के कारण कीमतें बढ़ाना जायज है। -संजय, ढाबा संचालक, कांगड़ा
हमें दिन-रात काम करना पड़ता है और सिलिंडर की बढ़ती कीमतों का असर हमारे मुनाफे पर पड़ रहा है। इसी कारण 30 रुपये वाला बर्गर 40 रुपये और समोसा-टिक्की 50 रुपये में बेचने को मजबूर हैं। -मोहिंद्र पाल, बर्गर विक्रेता, धर्मशाला लोग बोले- बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी बना चुनौती खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं के महंगे होने से आम आदमी की बचत खत्म हो रही है। अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी अब एक चुनौती बनता जा रहा है। -तिलक राज, ग्राहक कांगड़ामहंगाई ने आम जनता का बजट बिगाड़ दिया है। बाहर खाना खाने के लिए अब जेब में पहले से ज्यादा पैसे लेकर निकलना पड़ता है, जो कि बहुत कष्टदायक है। -प्यार सिंह, ग्राहक, पालमपुरअप्रैल में जारी रेट लिस्ट को कोई कारोबारी नहीं मान रहा है। हर कोई मनमानी कर रहा है। बकरे का मीट भी 550 रुपये की जगह 600 रुपये किलो बेचा जा रहा है। -पंकज चौधरी, ग्राहक, धर्मशालासबूतों के साथ करें शिकायत विभाग निरंतर निरीक्षण करता है। निरीक्षण के दौरान कारोबारी विभाग को निर्धारित दाम ही बताते हैं। यदि कोई कारोबारी तय दामों से अधिक पैसे वसूलता है तो ग्राहक अनिवार्य रूप से उस कारोबारी से बिल लें। प्रतिदिन हजारों मौखिक शिकायतें आती हैं।

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