Wednesday, June 10, 2026
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चंद घंटों में हो सकेगी खतरनाक बैक्टीरिया की पहचान, एम्स बिलासपुर में जल्द स्थापित होगी मशीन

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा कदम: एम्स बिलासपुर में लगेगी बैक्टीरिया पहचान मशीन

जागो! बिलासपुर/ सुभाष चंदेल

एम्स बिलासपुर में अब चंद घंटों में खतरनाक बैक्टीरियां की पहचान हो सकेगी। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जल्द ही आधुनिक मशीन वाइटेक 2 कांपेक्ट स्थापित होने जा रही है। मशीन लगने से शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया की पहचान अब दिनों के बजाय महज कुछ ही घंटों में हो जाएगी। इससे मरीज का इलाज तुरंत शुरू किया जा सकेगा।इस मशीन के दो मुख्य काम होंगे। पहला मरीज के शरीर में खून, यूरीन या पस के सैंपल में मौजूद बीमारी फैलाने वाले फंगस की पहचान करना। दूसरा यह जांचना कि उस बैक्टीरिया को जड़ से खत्म करने के लिए कौन सी एंटीबायोटिक दवा सबसे ज्यादा असरदार रहेगी और कौन बेअसर। मेडिकल भाषा में इसे ऑटोमेटेड बैक्टीरियल आईडी (आइडेंटिफिकेशन) एंड एएसटी (एंटीबायोटिक ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग) कहा जाता है, कंप्यूटर और रोबोटिक तकनीक पर काम करती है।जब किसी मरीज के शरीर में इंफेक्शन होता है, तो बैक्टीरिया की पहचान करने और सही दवा का पता लगाने के लिए कल्चर टेस्ट में कम से कम 48 से 72 घंटे का समय लग जाता है। तब तक डॉक्टर अंदाजे से दवाई देना शुरू कर देते हैं, लेकिन वाइटेक 2 कांपेक्ट के आने से संक्रमण फैलाने वाले सटीक बैक्टीरिया की पहचान कुछ ही घंटों में हो जाएगी।मरीजों के लिए इसका सीधा उपयोग
जब किसी मरीज को सेप्सिस (खून का संक्रमण), यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन), दिमागी बुखार या गंभीर निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारियां होती हैं, तो हर एक मिनट कीमती होता है। इस मशीन के उपयोग से मरीज को ट्रायल एंड एरर (अंदाजे से दवा देने) के दौर से नहीं गुजरना पड़ेगा। मरीज के शरीर में जो बैक्टीरिया होगा, उसे खत्म करने की सटीक दवा पहले ही दिन से शुरू हो जाएगी। इससे मरीज के शरीर पर दवाओं के साइड इफेक्ट्स बेहद कम होंगे और वह बहुत जल्दी स्वस्थ होकर अपने घर लौट सकेगा।

हिमाचल के मरीजों को कैसे मिलेगा इसका विशेष लाभ
भौगोलिक रूप से कठिन परिस्थितियों वाले हिमाचल प्रदेश के मरीजों के लिए यह मशीन वरदान साबित हो सकती है। अब तक इस तरह के एडवांस और ऑटोमेटेड टेस्ट के लिए प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को या तो चंडीगढ़ पीजीआई या दिल्ली का रुख करना पड़ता था, या फिर बेहद महंगे प्राइवेट अस्पताल में हजारों रुपये फूंकने पड़ते थे। पहाड़ी क्षेत्रों में समय पर रिपोर्ट न मिलने के कारण कई बार संक्रमण पूरे शरीर में फैल जाता था। अब बिलासपुर एम्स में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को राहत मिलेगी।

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