Wednesday, April 15, 2026
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बिना जरूरी मानकों के ही खोल दी गई ‘मधुशाला’।

काशीपुर-नाजिम खान

काशीपुर के चैती चौराहे पर आज इंसाफ और शराब के बीच सीधी जंग देखने को मिली। एक तरफ छात्र संघ अध्यक्ष जतिन शर्मा के नेतृत्व में आक्रोशित छात्र अपने भविष्य और शिक्षण संस्थानों की मर्यादा बचाने के लिए आत्मदाह तक की चेतावनी दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ आबकारी विभाग के अधिकारी दिवाकर चौधरी ‘अधूरे ज्ञान’ की पोटली लेकर छात्रों को समझाने पहुँच गए। हैरानी की बात यह है कि जिस दुकान को बिना किसी मानक के आनन-फानन में संचालित कर दिया गया, उसके बचाव में इंस्पेक्टर साहब ने बॉर्डर का ऐसा फर्जी हवाला दिया जो सरकारी नियमावली में कहीं है ही नहीं। अधिकारी का यह कहना कि ‘बॉर्डर के नजदीक होने के कारण 12:00 बजे तक दुकान खोलने की अनुमति है’, सीधे तौर पर जनता को गुमराह करने और शराब माफियाओं को संरक्षण देने जैसा प्रतीत होता है, क्योंकि नियमों की कहानी कुछ और है….सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि जब मीडिया ने दुकान की लोकेशन और दूरी पर सवाल दागे, तो इंस्पेक्टर साहब बगलें झांकते नजर आए। नियमों के मुताबिक लाइसेंस जारी होने से पहले ही पैमाइश हो जानी चाहिए थी, लेकिन यहाँ अधिकारी कैमरे के सामने बेशर्मी से कह रहे हैं कि ‘अब मेजर करेंगे’। क्या आबकारी विभाग ने बिना नाप-जोख किए ही इस विवादित दुकान को हरी झंडी दे दी? बाजपुर रोड की ओर मुंह खोलकर सजी इस दुकान में न तो आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्रों का अता-पता है और न ही ग्राहकों को लूट से बचाने के लिए कोई रेट लिस्ट चस्पा है। अंडर-कंस्ट्रक्शन दुकान में शराब की बोतलें परोसना और अधिकारी का जांच के नाम पर टालमटोल करना, साफ इशारा करता है कि काशीपुर आबकारी महकमा भ्रष्टाचार के नशे में चूर है। छात्र संघ का साफ संदेश है कि अगर इस अवैध मधुशाला को यहाँ से नहीं हटाया गया, तो प्रशासन को एक छात्र की बलि का जिम्मेदार होना पड़ेगा। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद क्या स्थानीय अधिकारी अपनी मनमर्जी चलाना जारी रखेंगे या फिर छात्रों के हक में कोई ठोस फैसला होगा

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