Sunday, September 20, 2026
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बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल, पांच दिवसीय बैंकिंग समेत लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन

दैनिक जागो वर्ल्ड !ऊना।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशभर में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने अखिल भारतीय हड़ताल की। हड़ताल के चलते विभिन्न स्थानों पर बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। ऊना में भी विभिन्न बैंकों और UFBU से जुड़े कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने हड़ताल में भाग लिया।यूनियन प्रतिनिधियों ने हड़ताल को व्यापक और सफल बताते हुए कहा कि बैंक कर्मचारी अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। नेताओं ने कहा कि औपचारिक समझौते और बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद मांगों को लागू नहीं किया गया है।यूनियन की प्रमुख मांग पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की है। नेताओं के अनुसार मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच इस संबंध में समझौता हुआ था, लेकिन ढाई वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद सहमत व्यवस्था लागू नहीं हुई है।

नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार के कार्यालयों में वर्ष 1985 से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। इसके अलावा राज्य सरकारों, जिला कार्यालयों, न्यायालयों, आयकर विभाग, शेयर बाजार, भारतीय रिजर्व बैंक और एलआईसी सहित कई संस्थानों में भी पांच दिन कार्य की व्यवस्था है। बैंक कर्मचारी इसके बावजूद ग्राहकों को एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से 24 घंटे बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।यूनियन नेताओं के अनुसार मार्च 2024 के समझौते में कर्मचारियों ने प्रत्येक कार्यदिवस में कार्य एवं बैंकिंग समय को 40 मिनट बढ़ाने पर सहमति दी थी, ताकि शनिवार को अवकाश होने के बावजूद ग्राहकों के लिए उपलब्ध कुल बैंकिंग समय में कमी न आए।हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने आर्थिक त्याग भी किया। नेताओं ने बताया कि हड़ताल में शामिल बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का उस दिन का वेतन काटा जाता है। इसके बावजूद कर्मचारियों ने सामूहिक मांगों के समर्थन में एक दिन का वेतन त्याग कर हड़ताल में भाग लिया।यूनियन प्रतिनिधियों ने हड़ताल को व्यापक और सफल बताते हुए कहा कि बैंक कर्मचारी अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। नेताओं ने कहा कि औपचारिक समझौते और बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद मांगों को लागू नहीं किया गया है।

यूनियन की प्रमुख मांग पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की है। नेताओं के अनुसार मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच इस संबंध में समझौता हुआ था, लेकिन ढाई वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद सहमत व्यवस्था लागू नहीं हुई है।नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार के कार्यालयों में वर्ष 1985 से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। इसके अलावा राज्य सरकारों, जिला कार्यालयों, न्यायालयों, आयकर विभाग, शेयर बाजार, भारतीय रिजर्व बैंक और एलआईसी सहित कई संस्थानों में भी पांच दिन कार्य की व्यवस्था है। बैंक कर्मचारी इसके बावजूद ग्राहकों को एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से 24 घंटे बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।यूनियन नेताओं के अनुसार मार्च 2024 के समझौते में कर्मचारियों ने प्रत्येक कार्यदिवस में कार्य एवं बैंकिंग समय को 40 मिनट बढ़ाने पर सहमति दी थी, ताकि शनिवार को अवकाश होने के बावजूद ग्राहकों के लिए उपलब्ध कुल बैंकिंग समय में कमी न आए।हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने आर्थिक त्याग भी किया। नेताओं ने बताया कि हड़ताल में शामिल बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का उस दिन का वेतन काटा जाता है। इसके बावजूद कर्मचारियों ने सामूहिक मांगों के समर्थन में एक दिन का वेतन त्याग कर हड़ताल में भाग लिया।पांच दिवसीय बैंकिंग के अलावा UFBU ने एकतरफा और भेदभावपूर्ण पीएलआई व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई है। यूनियनों ने मांग की है कि पीएलआई में किसी भी बदलाव अथवा उसके क्रियान्वयन से पहले यूनियनों एवं एसोसिएशनों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की जाए। साथ ही बैंकिंग उद्योग के अन्य लंबित मुद्दों का भी समाधान किया जाएस्थानीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूनियन नेताओं ने कहा कि हड़ताल की सफलता से स्पष्ट है कि बैंक कर्मचारी इन मुद्दों पर एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी कोई अनुचित रियायत नहीं मांग रहे हैं, बल्कि पहले से हुए समझौते को लागू करने और लंबित मुद्दों का न्यायसंगत समाधान चाहते हैं।इस मौके पर विभिन्न बैंक यूनियनों के पदाधिकारियों, कर्मचारियों और अधिकारियों सहित अंजनी शर्मा, राजेश शर्मा, अजय शर्मा,अनूप राणा , पंकज संधू अन्य नेता उपस्थित रहे।UFBU ने मुद्दों का समाधान नहीं होने की स्थिति में 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को आगे की अखिल भारतीय हड़तालों तथा 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का कार्यक्रम घोषित किया है। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार और IBA के पास अभी भी सार्थक वार्ता के माध्यम से मुद्दों का समाधान कर आगे की औद्योगिक कार्रवाई को टालने का अवसर है।

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