Sunday, September 20, 2026
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सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार में पहली बार केले, पीपल और हैज के पौधों का रोपण

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जिला सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी और चूड़ेश्वर महादेव की तपोस्थली चूड़धार में पहली बार केले, पीपल और हैज के पौधे रोपित किए गए हैं। करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित चूड़धार में सर्दियों के दौरान लगभग छह महीने तक बर्फ जमी रहती है। ऐसे कठिन मौसम के बावजूद पर्यावरण से जुड़े विजय कुमार ने यहां इन पौधों को उगाने का प्रयास शुरू किया है।

चूड़धार धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। यहां स्थित चूड़ेश्वर महादेव के शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पर्यावरण प्रेमी विजय कुमार का प्रयास है कि चूड़धार में देवदार के साथ पीपल और केले के पौधे भी विकसित हों, जिससे यहां की प्राकृतिक सुंदरता में और निखार आए तथा धार्मिक दृष्टि से उपयोगी पौधों को भी स्थान मिल सके।

विजय कुमार ने बताया कि* केले और पीपल जैसे पौधे आमतौर पर मध्यवर्ती क्षेत्रों में उगते हैं। चूड़धार की अत्यधिक ऊंचाई और कठोर मौसम को देखते हुए यहां इन पौधों को लगाने का यह पहला प्रयास है। उन्होंने कहा कि देवस्थान में पीपल और केले के पौधों का पूजा-पद्धति में विशेष महत्व है। हालांकि, सर्दियों में चूड़धार पूरी तरह बर्फ से ढकी रहती है, इसलिए इन पौधों का विकास काफी हद तक यहां के मौसम और वातावरण पर निर्भर करेगा।

इसी दौरान स्वर्गीय किंकरी देवी पार्क समिति के सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर सफाई अभियान भी चलाया। समिति के सदस्यों ने नौहराधार-जमनाला-तीसरी मार्ग पर फैले प्लास्टिक और अन्य कचरे को एकत्रित कर डस्टबिन में डाला। अभियान के माध्यम से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया।

पर्यावरण प्रेमी विजय कुमार और वार्ड सदस्य कमल राज चौहान ने चूड़धार आने वाले श्रद्धालुओं से विशेष अपील की है कि वे पॉलीथीन, प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट, कागज और अन्य कचरा खुले में न फेंकें। उन्होंने कहा कि कचरे को निर्धारित डस्टबिन में ही डालें, ताकि चूड़धार का प्राकृतिक वातावरण स्वच्छ बना रहे और यहां के प्राकृतिक जल स्रोत भी प्रदूषण से सुरक्षित रहें।

चूड़धार क्षेत्र में इस तरह के पौधरोपण और सफाई अभियान को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है। ऐसे में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की जिम्मेदारी है कि वे प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के बजाय इसके संरक्षण में सहयोग करें।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कठिन भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों के बीच लगाए गए ये पौधे विकसित होने में सफल रहते हैं, तो आने वाले समय में चूड़धार के प्राकृतिक स्वरूप में एक नया आकर्षण जुड़ सकता है। साथ ही सफाई अभियान से श्रद्धालुओं में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।

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