कथा व्यास आचार्य तरुण डोगरा जी ने रुद्राष्टक मंत्र, त्रिपुरासुर वध और पशुपति व्रत की महिमा सुनकर श्रद्धालु हुए भावविभोर
बंगाणा

बंगाणा, उपमंडल बंगाणा के अंतर्गत श्री राम नाटक क्लब हटली द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के अष्टम दिवस पर भक्तिमय वातावरण के बीच भक्ति, विभक्ति, विवेक और पुरुषार्थ का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया। इस पावन अवसर पर श्री राम नवमी के उपलक्ष्य में कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण शिवमय हो गया। कथा व्यास आचार्य श्री श्री तरुण डोगरा जी ने भगवान शिव की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए अनेक पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म और भक्ति का संदेश दिया। कथा व्यास आचार्य तरुण डोगरा जी ने श्री राम नवमी के विशेष अवसर पर भगवान शंकर को प्रसन्न करने वाले पवित्र रुद्राष्टक मंत्र का विधिवत अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि रुद्राष्टक मंत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और जो भी व्यक्ति सच्ची श्रद्धा, श्रेष्ठ भावना और नियमित रूप से इस मंत्र का पाठ करता है, वह इस संसार के बंधनों से मुक्त होकर भगवान शिव की विशेष कृपा का पात्र बनता है। उन्होंने बताया कि रुद्राष्टक केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि भगवान शिव की अनंत महिमा और करुणा का प्रतीक है, जिसका नित्य स्मरण करने से जीवन में शांति, सुख और मोक्ष की प्राप्ति संभव है। आचार्य श्री तरुण डोगरा जी ने कथा के दौरान तारकासुर दैत्य के तीन पुत्रों का रोचक प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि तारकासुर के तीन पुत्रों ने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न किया और उनसे तीन अद्भुत नगरियां मांग लीं। इन नगरियों की विशेषता यह थी कि वे 1000 वर्षों तक सभी के लिए अदृश्य रहती थीं और 1000 वर्ष के बाद केवल एक मुहूर्त के लिए भगवान शिव ही उन्हें देख सकते थे। साथ ही उन्होंने यह वरदान भी मांगा कि उनकी मृत्यु केवल भगवान शिव के हाथों हो और वह भी तब, जब भगवान शिव एक ही बाण से तीनों नगरियों को भस्म कर दें। जब इन दैत्यों ने अपने वरदान के बल पर अत्याचार करना शुरू किया और देवताओं तथा धरती के प्राणियों को कष्ट देने लगे, तब सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे और उनसे रक्षा की प्रार्थना की। देवताओं के आग्रह पर भगवान शिव ने सबसे पहले आदि विनायक भगवान गणेश का विधिपूर्वक पूजन किया और शुभ मुहूर्त में एक ही बाण से तीनों दैत्यों की नगरियों को जलाकर भस्म कर दिया। इस अद्भुत पराक्रम के कारण भगवान शिव का नाम त्रिपुरारी पड़ा। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु अत्यंत भावविभोर हो गए और पूरे पंडाल में “हर हर महादेव” के जयकारे गूंज उठे। कथा के दौरान कथा व्यास आचार्य तरुण डोगरा जी ने भगवान शिव को प्रसन्न करने वाले पवित्र पशुपति व्रत की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि यह व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का एक श्रेष्ठ माध्यम है। जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और उसे आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव अत्यंत भोले और दयालु हैं, जो अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।
व्यास जी ने आगे शंखचूड़ और जालंधर जैसे दुष्ट असुरों की कथा का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि इन दैत्यों ने अपने बल और अहंकार के कारण धरती पर अत्याचार करना शुरू कर दिया था और धर्म को हानि पहुंचाने का प्रयास किया। जब उनके अत्याचार असहनीय हो गए, तब भगवान शिव ने उनका वध कर धरती और धर्म की रक्षा की। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने बड़े श्रद्धा भाव से कथा का श्रवण किया और भगवान शिव की भक्ति में लीन दिखाई दिए। श्री राम नवमी के पावन अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की गई,जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। कथा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और भजन-कीर्तन के माध्यम से भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्री राम नाटक क्लब हटली के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बताया कि शिव महा पुराण कथा का आयोजन क्षेत्र में धार्मिक जागरूकता और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का लाभ उठाने पहुंच रहे हैं और सभी श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था की गई है। अष्टम दिवस की कथा के समापन पर आरती की गई और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। कथा के दौरान क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। श्रद्धालुओं ने कथा व्यास आचार्य तरुण डोगरा जी के प्रवचनों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कथाएं समाज में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक संस्कारों को बढ़ावा देती हैं। इस मौके पर क्लब के प्रधान मदन सोनी संजय सोनी सुरेन्द्र हटली सुरेन्द्र राणा विवेकशील शर्मा किशन दत्त शास्त्री किशन देव शर्मा कमल देव शर्मा आदि बड़ी संख्या में गणमान्य मौजूद रहे।
