शिमला-टीना ठाकुर

शिमला में पंचायत चुनावों को लेकर विधानसभा में जोरदार बहस और हंगामा देखने को मिला। रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार लगातार पंचायती राज चुनावों को टालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव दिसंबर में होने चाहिए थे, लेकिन हर बार सरकार ने किसी न किसी बहाने से इन्हें रोका। आपदा एक्ट का हवाला देकर चुनाव प्रक्रिया को बाधित किया गया, जबकि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी 31 मई तक चुनाव करवाने की बात कही, फिर भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रणधीर शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायती राज विभाग ने नियमों की अनदेखी करते हुए 31 मार्च को रोस्टर जारी करने के बजाय अधिसूचना जारी कर दी, जिसमें उपायुक्त को 5 प्रतिशत आरक्षण रोस्टर में बदलाव की शक्ति दी गई। उन्होंने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस तरह के फैसले देर रात लिए जा रहे हैं, जिससे सरकार की नीयत पर संदेह होता है।
वहीं, कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की बात तक नहीं मानी और प्रश्नकाल भी नहीं चलने दिया। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां भी कई फैसले रात के अंधेरे में होते हैं। नेगी ने 5 प्रतिशत रोस्टर बदलाव का बचाव करते हुए कहा कि यह व्यवस्था इसलिए रखी गई है ताकि विभिन्न पंचायतों में आरक्षण से जुड़े मुद्दों का न्यायपूर्ण समाधान हो सके और जरूरत पड़ने पर सीमित बदलाव किए जा सकें।
नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार आने के बाद पारदर्शिता खत्म हो गई है और हर व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नगर निकाय चुनावों में पहले से पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया जा रहा, जिससे संदेह पैदा हो रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार का मकसद हंगामा करना नहीं है और पंचायत चुनाव 31 मई से पहले हर हाल में करवा दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 5 प्रतिशत रोस्टर बदलाव की शक्ति सीमित है और यदि सरकार की मंशा गलत होती तो यह सीमा अधिक रखी जाती। साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मार्च में चुनाव न कराने का फैसला छात्रों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए लिया गया, क्योंकि शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी से पढ़ाई प्रभावित होती है।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि नियम 67 के तहत उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लिया जाएगा और प्रश्नकाल के बाद ही इस पर चर्चा होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उपायुक्त को दी गई शक्तियां नियमों के तहत हैं। हालांकि, उनके बयान के बाद भी विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और सदन में नारेबाजी करते हुए अपना विरोध जारी रखा, जिससे माहौल लगातार गरमाया रहा।

