शिमला-टीना ठाकुर

मित्तल इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए स्कूल संचालित करने वाली सोसाइटी की उप-प्रधान और वर्तमान एक्टिंग प्रेसिडेंट मनीषा सरस्वती मित्तल ने मीडिया के सामने कई चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि वह 15 अगस्त 2007 से इस संस्था से जुड़ी हैं और अपने माता-पिता के निधन के बाद से कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनके अनुसार जनवरी 2021 में हिमांक मित्तल ने कुछ लोगों के साथ मिलकर एक फर्जी गवर्निंग बॉडी का गठन किया, जिससे पूरे मामले में विवाद खड़ा हो गया।
इस मामले की जांच एसडीएम स्तर पर कराई गई, जिसकी रिपोर्ट 2 मार्च 2022 को सामने आई। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से फर्जी दस्तावेज और जाली कार्यवाही (प्रोसिडिंग) बनाए जाने की बात सामने आई। मनीषा मित्तल ने हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से भी जांच करवाई, जिसमें फर्जीवाड़ा साबित हुआ। जांच में वित्तीय गड़बड़ियों के संकेत भी मिले, जिस पर उच्च स्तर (ACS) से ऑडिट की सिफारिश की गई और जरूरत पड़ने पर FIR दर्ज करने की बात कही गई। इस रिपोर्ट को एडीएम, डीसी और रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटी सहित संबंधित अधिकारियों ने भी सही ठहराया।
मनीषा मित्तल का कहना है कि हिमांक मित्तल सोसाइटी का सदस्य बनने के योग्य ही नहीं था, क्योंकि नियम के अनुसार “एक परिवार, एक सदस्य” का प्रावधान लागू है। इसके बावजूद उन्हें अवैध रूप से शामिल किया गया और उन्हें (मनीषा) उप-प्रधान पद से भी गलत तरीके से हटाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें स्कूल में प्रवेश से रोका गया, गेट बंद करवा दिए जाते थे और कैमरों से निगरानी रखी जाती थी।
उन्होंने 13 जून 2023 को कराए गए चुनावों को भी अवैध बताया, जिनके खिलाफ उन्होंने अपील की। 16 दिसंबर 2025 को उनकी अपील को सही ठहराते हुए चुनावों पर रोक लगा दी गई और दोबारा जांच के आदेश दिए गए। इसके बावजूद 19 मार्च को एक नई रिपोर्ट में चुनावों को सही बताया गया, जिसे मनीषा ने विरोधाभासी और संदिग्ध करार दिया।
घटना ने तब और तूल पकड़ लिया जब 25 जनवरी 2026 को मनीषा मित्तल ने स्कूल में प्रवेश किया और उन पर झूठा आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई। हालांकि पुलिस जांच में सच्चाई सामने आने के बाद तीन लोगों को हिरासत में लिया गया। इस दौरान एक चौकीदार, जिसने सच्चाई बताई, उसे नौकरी से निकाल दिया गया।
मनीषा मित्तल ने प्रधानाचार्य नीरज वर्मा पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि फर्जी हस्ताक्षर के साथ एक नकली आवेदन तैयार किया गया, जो एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति बच्चों को क्या शिक्षा देंगे।
1 अप्रैल को हुई एक और घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हिमांक मित्तल अपने साथियों के साथ स्कूल पहुंचे और जबरन ताले लगाने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बुलाना पड़ा और स्टाफ मौके से भाग गया। इस दौरान कुछ PTA सदस्यों ने भी हस्तक्षेप किया और किसी तरह स्थिति संभाली गई।
वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मनीषा ने कहा कि उनके पिता द्वारा नई शाखा के लिए लिया गया लगभग 8.80 करोड़ रुपये का लोन, जो बाद में FD में रखा गया था, उसे भी हिमांक मित्तल अपने साथ ले गए।
मनीषा मित्तल ने अभिभावकों और कर्मचारियों से अपील की कि वे किसी भी तरह के डर में न रहें और स्कूल के सुचारू संचालन में सहयोग करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि अब स्कूल में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होने दी जाएगी और उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाना है। उन्होंने छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग, अतिरिक्त कक्षाएं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध कराने की भी योजना साझा की।



