Tuesday, April 14, 2026
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संजौली गुरुद्वारा विवाद: चुनाव में देरी, पारदर्शिता पर सवाल और संगत की आवाज़ दबाने के आरोप

शिमला-टीना ठाकुर

शिमला के संजौली गुरुद्वारा प्रबंधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कश्मीर सिंह ने कहा कि वे संगत की ओर से अपनी बात रखने आए हैं, लेकिन कुछ लोगों द्वारा संगत के सदस्यों को गुरुद्वारे में आने से रोका जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में चुनाव होने चाहिए थे, लेकिन तीन-चार साल से चुनाव नहीं कराए गए और न ही धनराशि का कोई स्पष्ट हिसाब-किताब दिया जा रहा है। जबकि अप्रैल 2025 तक चुनाव कराए जाने थे, अब मार्च 2026 की बात कही जा रही है, जिसे उन्होंने पूरी तरह गलत बताया।
कश्मीर सिंह ने यह भी कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधन में 17 सदस्यीय कार्यकारिणी होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में केवल तीन लोग ही सभी निर्णय ले रहे हैं। संगत को चुनाव की सूचना एक माह पहले देने का नियम है, लेकिन ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि संगत की आवाज़ दबाई जा रही है और धार्मिक संस्था में लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना बेहद गलत है। साथ ही, कुछ लोगों द्वारा राजनीतिक दबाव बनाने और झूठी खबरें फैलाने की भी बात कही गई। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों की स्कूटी को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे जान का खतरा महसूस किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू और सिख समुदाय के बीच आपसी भाईचारा है, लेकिन कुछ तत्व डर का माहौल बना रहे हैं। संजौली गुरुद्वारा एक सोसायटी के अंतर्गत आता है और इस मामले को लेकर सितंबर 2026 में एसडीएम से भी मुलाकात की गई, जहां से यह मामला कोर्ट में जाने की बात कही गई। कश्मीर सिंह ने आरोप लगाया कि गुरुद्वारे में लोगों को सेवा करने से भी रोका जा रहा है, जिसके कारण कुछ परिवार संजौली छोड़कर अन्य स्थानों पर शिफ्ट हो गए हैं। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से अपील की कि आपसी सहमति से समय पर चुनाव कराए जाएं, ताकि धार्मिक कार्य सुचारू रूप से और प्रेमपूर्वक चलते रहें।
वहीं, पूर्व कोषाध्यक्ष हरभजन ने भी प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें कार्यकाल के दौरान प्रश्न पूछने से रोका गया। उन्होंने बताया कि कुछ पदाधिकारियों ने उन्हें दोबारा पद देने की बात कही, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि वे केवल नियमों के तहत ही कार्य करेंगे, अन्यथा जिम्मेदारी नहीं।

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