Tuesday, March 17, 2026
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108–102 एंबुलेंस कर्मियों का सब्र टूटा, हड़ताल की चेतावनी से सरकार पर दबाव

ऊना ब्यूरो रिपोर्ट, भारत भूषण

हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। जिला ऊना सहित प्रदेशभर में कार्यरत एंबुलेंस कर्मचारियों ने अपने वेतन, सेवा सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों को लेकर आवाज़ बुलंद करते हुए हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्षों से उनकी जायज मांगों को सरकार और प्रबंधन लगातार नजरअंदाज करता आ रहा है।
एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो कर्मचारी 12 फरवरी सुबह 8 बजे से 17 फरवरी सुबह 8 बजे तक हड़ताल पर रहेंगे। यूनियन ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्रबंधन को नोटिस भी जारी कर दिया है।
आपको बताते चलें कि 10 जनवरी से एंबुलेंस कर्मचारी पेन डाउन स्ट्राइक पर हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन और सरकार को अपनी मांगों से अवगत करवा चुके हैं, बावजूद इसके हर बार आश्वासन के सिवा कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।
कर्मचारियों का कहना है कि वे आपातकालीन सेवाओं में दिन-रात तैनात रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो न्यूनतम वेतन का पूरा लाभ मिलता है और न ही ओवरटाइम का भुगतान किया जाता है। कई कर्मचारियों को 12 घंटे से अधिक ड्यूटी करने के बावजूद अतिरिक्त मेहनताना नहीं दिया जाता, जो श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है।
मांगें और प्रमुख मुद्दे
एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन का विधिसम्मत भुगतान, 12 घंटे से अधिक ड्यूटी पर ओवरटाइम वेतन, सभी प्रकार की वैधानिक छुट्टियां, सेवा सुरक्षा और मनमानी बर्खास्तगी पर रोक शामिल है। इसके साथ ही कर्मचारियों ने सेवा से हटाए गए कर्मियों की बहाली, पूर्व सेवा अवधि को मान्यता देने और हर वर्ष वेतन में कम से कम 10 प्रतिशत वृद्धि की मांग भी उठाई है।
यूनियन नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल वेतन बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन समय रहते बातचीत कर समाधान निकालते हैं, तो हड़ताल की नौबत टाली जा सकती है।
सरकार की भूमिका पर सवाल
कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इन्हीं सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले कर्मचारियों की अनदेखी की जा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आपातकाल में जनता की जान बचाने वाले कर्मचारी यदि सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
अब सभी की नजरें सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो हड़ताल का असर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।

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