Sunday, September 6, 2026
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आंदोलन को हाइजैक होने से बचाएं, नेतृत्व अपने हाथ में रखें छात्र; सुलगते हालात पर झारखंड के सीनियर जर्नलिस्ट की दो टूक

दैनिक जागो वर्ल्ड झारखंड

रांची में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 13वें दिन भी जारी है। पत्रकारों ने सरकार को त्वरित फैसले लेने और छात्रों को आंदोलन का नेतृत्व अपने हाथ में रखने की सलाह दी है। पढ़िए क्या कहते हैं झारखंड के सीनियर जर्नलिस्ट।

झारखंड की राजधानी रांची में 13वें दिनों युवाओं का आक्रोश और संघर्ष अपने चरम पर है। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित धांधली, अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ पिछले कई दिनों से छात्र सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं।आंदोलन में भीड़ बढ़ रही है। छात्रों की संख्या दोगुना हो गई है। एक तरफ जहां सरकार ने स्थिति को संभालते हुए उच्च स्तरीय मंत्रियों की कमेटी बनाकर छात्रों को वार्ता का न्योता भेजा है, वहीं छात्र नेताओं का कहना है कि सिर्फ जांच और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि आयोगों में बुनियादी सुधार और परीक्षा रद करने जैसे कड़े व त्वरित फैसले लेने होंगे।

मूसलाधार बारिश के बीच जयपाल सिंह मुंडा की प्रतिमा के पास अनशन पर बैठे एक छात्र की तस्वीर ने पूरे राज्य के सियासी गलियारों को झकझोर कर रख दिया है। झारखंड के सीनियर जर्नलिस्ट इस आंदोलन को कैसे देखते हैं, जानिए। सीनियर जर्नलिस्ट सन्नी शरद सवाल उठाते हैं, एक छोटा भी साइबर फ्रॉड को पकड़ती है तो उसकी तस्वीर जारी करती है, लेकिन युवाओं के सपने को बेचने और रौंधने वालों की अब तक एक भी तस्वीर जारी नहीं हुई है। जबकि अब तक 19 लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है। इनके चेहरे को छुपाया नहीं जाए बल्कि बेनक़ाब किया जाए नहीं तो ये आगे फिर वही करेंगे।वरिष्ठ पत्रकार राकेश परिहार कहते हैं, इस आंदोलन के बहाने वर्षों से जमा गुस्सा सामने आ रहा है। जंतर-मंतर का भी असर है। परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के लिए वर्तमान सरकार ही नहीं, पिछली सरकारें भी दोषी है। जेपीसीएसी की वर्किंग कभी सही नहीं रही है। अब आंदोलन में छात्रों की संख्या दोगुना हो गई है।एक तरफ जहां सरकार ने स्थिति को संभालते हुए उच्च स्तरीय मंत्रियों की कमेटी बनाकर छात्रों को वार्ता का न्योता भेजा है, वहीं छात्र नेताओं का कहना है कि सिर्फ जांच और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा।वरिष्ठ पत्रकार विजय पाठक कहते हैं- आंदोलन को हाइजैक मत होने देना झारखंड के बच्चों, बहुत लोग घूमने लगे हैं…और भी आएंगे। आपने जो रास्ता चुना है, जो संयम दिखाया है, वह काबिलेतारीफ़ है…। बातचीत में भी बाहरी तत्वों को घुसने मत देना, नेतृत्व अपने हाथ में ही रखना।जमशेदपुर के राजनीतिक विश्लेषक आनंद कुमार लिखते हैं- सरकार माइंड गेम खेल रही है, वार्ता का न्योता भेज दिया। चार मंत्रियों की हाई लेवल कमेटी बना दी। अब अगर छात्र वार्ता को नहीं जाते हैं तो इस आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश भी की जाएगी और यह कहा जाएगा कि विपक्ष का खड़ा किया हुआ आंदोलन है और आंदोलनकारी समाधान नहीं चाहते बेहतर है कि जिन एसडीओ और एडीएम के जरिए वार्ता का पैगाम भिजवाया गया है। उन एसडीएम और एसडीओ को छात्र अपनी मांगें लिखित में दे दें.. क्योंकि छात्र जाएंगे तो भी उनसे लिखित में मांग पत्र मांगा ही जाएगा।  आनंद कहते हैं, छात्रों को सलाह देते हैं- आप एसडीओ और एडीएम के जरिए मांगे भिजवा दें और यह कहें कि मुख्यमंत्री जी को यह मांग पत्र सौंप दिया जाए और मुख्यमंत्री जी और सरकार अगर इन मांगों को मानने के लिए तैयार हों (विचार करने के लिए नहीं)।

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