Sunday, September 6, 2026
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दो भेड़ों की लड़ाई से जन्मा है गुजरात का ‘हूडो’ नृत्य, जिसमें थिरकते कदमों के साथ लड़कियां चुनती हैं अपना जीवनसाथी

दैनिक जागो वर्ल्ड !गुजरात

गुजरात का एक ऐसा नृत्य जिसकी शुरुआत भेड़ों की लड़ाई से हुई और अंत स्वयंवर पर। इंसानों के साथ प्रकृति का अटूट संबंध किसी से छिपा नहीं है और इसी संबंध के ही कहीं मध्य से जन्म लेती है संस्कृति। यही वजह है कि हम जब भी किसी लोकगीत या लोकनृत्य की बात करते हैं तो उसमें प्रकृति का कोई न कोई कनेक्शन जरूर मिलता है। इसी कड़ी में आज हम आपको गुजरात के हूडो लोकनृत्य के बारे में बताएंगे कि कैसे चरवाहों ने पशुओं के खेल से इस नृत्य की रचना कर डाली। 

भेड़ों की लड़ाई से शुरू हुआ गुजरात का ‘हूडो’हूडो’ लोकनृत्य का संबंध गुजरात के चरवाहा समुदाय भारवाड़ जनजाति से है। कहते हैं कि इस लोकनृत्य की शुरुआत किसी उत्सव या संस्कृति से नहीं, बल्कि भेड़ों की लड़ाई से हुई थी। जब दो भेड़ एक दूसरे से सिर टकराकर आपस में लड़ रही थीं, तब इसी गतिविधि को गौर से देखकर भारवाड़ जनजाति के लोग बाद में हूबहू दोहराते थे। फिर समय बीतता गया और इस गतिविधि ने नृत्य का रूप ले लिया और इस तरह ‘हूडो’ लोकनृत्य का जन्म हुआ। 

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