दैनिक जागो वर्ल्ड !बुंदेलखंड

दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाना, गुणवत्तापूर्ण बीज और नई तकनीक किसानों तक पहुंचाना जरूरी है, साथ ही बदलते मौसम की चुनौतियों से निपटना होगा। बुंदेलखंड की मिट्टी और जलवायु में चना, अरहर जैसी दलहन फसलों के उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, जिसे मजबूत केंद्र बनाया जा सकता है।

देश को दलहन उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केवल फसल का रकबा बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। सीमित भूमि में प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने, किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज और नई तकनीक पहुंचाने के साथ बदलते मौसम की चुनौतियों से निपटना होगा।
