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उत्तराखंड के 10 जिलों में मानसून की भारी वर्षा से 1558 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिनमें देहरादून में सर्वाधिक 521 योजनाएं प्रभावित हुई हैं।राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड के 10 जिलों में मानसून की तेज वर्षा ने पेयजल व्यवस्था की चाल बिगाड़ी है। एक जुलाई से अब तक राज्यभर में 1558 पेयजल योजनाएं आपदा में क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनमें सर्वाधिक 521 देहरादून, जबकि सबसे कम तीन योजनाएं रुद्रप्रयाग जिले की हैं।

उत्तराखंड जल संस्थान ने 363.52 लाख रुपये खर्च कर सभी क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं को अस्थायी रूप से बहाल कर दिया है, लेकिन इनकी स्थायी मरम्मत के लिए 2791.09 लाख रुपये की आवश्यकता है।
संस्थान की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार वर्षा, भूस्खलन, मलबा और नदी-नालों के उफान के कारण इन पेयजल योजनाओं की पाइपलाइनों समेत अन्य ढांचों को क्षति पहुंची है। शासन से आग्रह किया गया है कि इन योजनाओं की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए बजट की उपलब्धता कराई जाए।देहरादून, 521
पिथौरागढ़, 266
उत्तरकाशी, 188
टिहरी, 183
चमोली, 135
नैनीताल, 87
पौड़ी, 69
अल्मोड़ा, 61
रुद्रप्रयाग, 45
बागेश्वर, 03
ये योजनाएं हुई क्षतिग्रस्त
1146 क्षतिग्रस्त योजनाएं जल संस्थान की।
412 योजनाएं ग्राम पंचायतों की देखरेख वाली।1413 योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में हुई क्षतिग्रस्त।
145 योजनाएं शहरी क्षेत्रों की प्रभावित।
363.52 लाख रुपये इन योजनाओं को अस्थायी रूप से चालू करने पर खर्च।
2791.09 लाख रुपये चाहिए इनकी मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए।
आपदा में क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं के प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश जल संस्थान को दिए गए हैं। यह भी कहा गया है कि सभी योजनाओं से जलापूर्ति हर हाल में बहाल रखी जाए। – रणवीर सिंह चौहान, सचिव पेयजल
