Sunday, September 6, 2026
HomeNation WiseDelhiदिल्ली एयरपोर्ट पर एयर ट्रेन और T4 की तैयारी, बिना री-चेकिंग बदल...

दिल्ली एयरपोर्ट पर एयर ट्रेन और T4 की तैयारी, बिना री-चेकिंग बदल सकेंगे टर्मिनल; क्या है मास्टर प्लान?

दैनिक जागो वर्ल्ड दिल्ली

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का 2026-2036 का मास्टर प्लान अंतिम चरण में है, जिसका लक्ष्य यात्री क्षमता को 10.5 करोड़ से बढ़ाकर 14 करोड़ करना है। यह योजना एयर ट्रेन, टी4 टर्मिनल और वाणिज्यिक विकास पर केंद्रित है।

देश के सबसे बड़े इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को अगले एक दशक में बिल्कुल नए और वैश्विक अवतार में ढालने की तैयारी अंतिम चरण में है।नियमों के तहत हर 10 वर्ष में मास्टर प्लान की समीक्षा करनी अनिवार्य है। इसी नियम का पालन करते हुए आईजीआई एयरपोर्ट की संचालन एजेंसी ”डायल” अपना अगला मास्टर प्लान (2026-2036) तैयार कर रही है। आने वाले एक से दो महीने में इस नए मास्टर प्लान की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। जह नया प्लान न केवल आईजीआई एयरपोर्ट की कुल यात्री क्षमता को 10.5 करोड़ से बढ़ाकर 14 करोड़ पहुंचाएगा, बल्कि पड़ोसी नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से मिलने वाली चुनौती के बीच दिल्ली के वर्चस्व को भी सुरक्षित रखेगा। नए मास्टर प्लान में उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जो पिछले प्लान में अधूरी या लंबित रह गई थीं।

टाटा के अधीन एअर इंडिया और इंडिगो द्वारा सैकड़ों नए विमानों के आर्डर के बाद, दोनों एयरलाइंस अपने-अपने ग्रुप के लिए समर्पित टर्मिनल मांग रही हैं। इसके साथ ही टी1, टी2 और टी3 के बीच नौ किमी की दूरी तय करने के लिए एलिवेटेड ”एयर ट्रेन” को हरी झंडी दी जा रही है।टी 3 के ”पियर सी” को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बदलते ही टी3 की अंतरराष्ट्रीय यात्री क्षमता 2 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ सालाना कर दी गई है। वहीं, पूरे एयरपोर्ट की कुल क्षमता को 2029-30 तक टी3 में नया ”पियर ई” जोड़कर 10.5 करोड़ से बढ़ाकर 12.5 करोड़ किया जाएगा।जेवर का प्रभाव देखने के लिए टी2 कम से कम 2030 तक चालू रहेगा, जिसके बाद टी2 को ढहाकर नया ”टर्मिनल 4” (टी4) बनेगा और कुल क्षमता 14 करोड़ पहुंच जाएगी।सुरक्षा जांच पूरी कर चुके यात्रियों को बिना दोबारा सिक्योरिटी चेकिंग के एयरसाइड से ही दूसरे टर्मिनल भेजा जाएगा। साथ ही, बीसीएएस की मंजूरी से अंतरराष्ट्रीय से घरेलू यात्रियों के लिए एयरसाइड बैगेज ड्राप का ट्रायल शुरू हो चुका है, जिससे यात्रियों को खुद बैग टी1/टी2/टी3 ले जाने का झंझट खत्म होगा। आने वाले समय में यात्रियों के एयरसाइड ट्रांसफर के लिए भी मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है।आयर रपोर्ट परिसर के बाहरी हिस्से में एयरोसिटी का विस्तार, नए लक्जरी होटल, बिजनेस पार्क और कमर्शियल हब विकसित कर गैर-उड्डयन राजस्व बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।मई 2006 में निजीकरण के बाद बने पहले मास्टर प्लान को 2016 में (फेज 3ए व 3बी) री-लाइन किया गया था। पिछले प्लान के तहत 2010 राष्ट्रमंडल खेलों से पहले टी3 टर्मिनल, देश का पहला 4-रनवे सिस्टम, ईस्टर्न क्रास टैक्सीवे , नया एकीकृत टी1 और ”एयरोसिटी” हब अस्तित्व में आया। हालांकि, टी1 और टी3 के क्षमता विस्तार को प्राथमिकता देने के कारण ”एयर ट्रेन” और ”टी4” जैसी योजनाएं पिछले प्लान में पिछड़ गई थीं।

RELATED ARTICLES

Most Popular