ग्रामीण भारत की कमान अब महिलाओं के हाथ, 53.82% सीटों के साथ रचा इतिहास। पंचायती राज चुनावों में महिलाओं की रिकॉर्ड जीत सशक्तिकरण की नई गाथा लिख रही है।
जागो!शिमला,टीना ठाकुर

हिमाचल प्रदेश में दो दिन पहले संपन्न हुए पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव ने गांव की सरकार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की नई तस्वीर पेश की है। प्रदेश में 16,691 महिलाएं जिला परिषद, पंचायत समिति और पंचायतों के विभिन्न पदों पर चुनी गई हैं। ये कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का 53.82 प्रतिशत हैं। वहीं 14,320 पुरुष प्रतिनिधि चुने गए हैं, जिनकी हिस्सेदारी 46.18 प्रतिशत रही है। ऐसे में ज्यादातर पंचायतों की कमान महिलाओं के हाथों में होगी।हिमाचल में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिला है, लेकिन इस बार इनकी भागीदारी इससे आगे बढ़ गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं ने इस बार केवल आरक्षित ही नहीं, अनारक्षित सीटों पर भी पुरुषों को हराकर जीत दर्ज की है। निर्वाचित महिलाओं में अनुसूचित जाति वर्ग की 4,539, अनुसूचित जनजाति वर्ग की 1,176, अन्य पिछड़ा वर्ग की 226 और अन्य वर्ग की 9,555 शामिल हैं।प्रदेश में वर्ष 1995 के पंचायत चुनाव में पहली बार महिलाओं तथा अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू की गई थी। वर्ष 2008 में पंचायती राज अधिनियम में संशोधन कर महिलाओं का आरक्षण बढ़ाया गया। साल 2010 के चुनाव से 50 प्रतिशत आरक्षण मिला। ताजा चुनाव परिणाम दर्शाते हैं कि हिमाचल की महिलाएं अब केवल मतदाता ही नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली सशक्त जनप्रतिनिधि के रूप में भी ग्रामीण विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।नगर निकाय और पंचायती राज चुनाव में युवा महिला शक्ति ने दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। मतदाताओं ने युवा और शिक्षित महिला नेतृत्व पर भरोसा जताकर बदलाव का स्पष्ट संदेश दिया है। नगर निकाय चुनाव में पालमपुर नगर निगम के वार्ड नंबर-13 (आईमा) से 29 वर्षीय अंचना सबसे कम उम्र की विजयी प्रत्याशी बनीं। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में कांगड़ा के रियाली वार्ड से साक्षी और शिमला के चडोली से मन्नत तेगवान ने 21 वर्ष की उम्र में जिला परिषद सदस्य का चुनाव जीता। 19 साल की उम्र में स्पीति वार्ड से पंचायत समिति सदस्य बनीं टशी पलमो और सोलन जिले के धर्मपुर से लक्ष्मी ने जीत दर्ज कर ग्रामीण राजनीति में कदम रखा है।

