Sunday, September 6, 2026
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वंदे मातरम् के समय कांग्रेस नेतृत्व का आचरण देश की भावनाओं का अपमान : रूपेंद्र सिंह दहल

दैनिक जागो वर्ल्ड ऊना

भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश मीडिया सहप्रभारी रूपेंद्र सिंह दहल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा वंदे मातरम् गान के दौरान कथित तौर पर गंभीरता और गरिमा का परिचय न देने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

रूपेंद्र सिंह दहल ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति करोड़ों देशवासियों की श्रद्धा, स्वतंत्रता संग्राम की स्मृति और राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक है। ऐसे पवित्र अवसर पर देश के बड़े राजनीतिक दल के शीर्ष नेताओं का गंभीरता से खड़े होकर सम्मान न करना और गान के दौरान इधर-उधर इशारे करते हुए दिखाई देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेताओं से देश की जनता अनुकरणीय आचरण की अपेक्षा करती है। जब कैमरे के सामने देश का राष्ट्रीय गीत गूंज रहा हो, तब भी यदि नेतृत्व उसकी गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं करता, तो यह कांग्रेस की राष्ट्रभक्ति के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

दहल ने कहा, “जो लोग वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रभावना के प्रतीक के सामने दो मिनट पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ खड़े नहीं हो सकते, वे देश की जनता और उसकी भावनाओं का कितना सम्मान करते होंगे—यह सवाल आज हर देशवासी कांग्रेस से पूछ रहा है।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति और राष्ट्र सम्मान का पाठ पढ़ाने से पहले अपने नेताओं के आचरण पर ध्यान देना चाहिए। भारत माता के सम्मान के सामने राजनीति, विचारधारा और दलगत मतभेद गौण हो जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेताओं से देश की जनता अनुकरणीय आचरण की अपेक्षा करती है। जब कैमरे के सामने देश का राष्ट्रीय गीत गूंज रहा हो, तब भी यदि नेतृत्व उसकी गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं करता, तो यह कांग्रेस की राष्ट्रभक्ति के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

दहल ने कहा, “जो लोग वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रभावना के प्रतीक के सामने दो मिनट पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ खड़े नहीं हो सकते, वे देश की जनता और उसकी भावनाओं का कितना सम्मान करते होंगे—यह सवाल आज हर देशवासी कांग्रेस से पूछ रहा है।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति और राष्ट्र सम्मान का पाठ पढ़ाने से पहले अपने नेताओं के आचरण पर ध्यान देना चाहिए। भारत माता के सम्मान के सामने राजनीति, विचारधारा और दलगत मतभेद गौण हो जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेताओं से देश की जनता अनुकरणीय आचरण की अपेक्षा करती है। जब कैमरे के सामने देश का राष्ट्रीय गीत गूंज रहा हो, तब भी यदि नेतृत्व उसकी गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं करता, तो यह कांग्रेस की राष्ट्रभक्ति के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

दहल ने कहा, “जो लोग वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रभावना के प्रतीक के सामने दो मिनट पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ खड़े नहीं हो सकते, वे देश की जनता और उसकी भावनाओं का कितना सम्मान करते होंगे—यह सवाल आज हर देशवासी कांग्रेस से पूछ रहा है।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति और राष्ट्र सम्मान का पाठ पढ़ाने से पहले अपने नेताओं के आचरण पर ध्यान देना चाहिए। भारत माता के सम्मान के सामने राजनीति, विचारधारा और दलगत मतभेद गौण हो जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेताओं से देश की जनता अनुकरणीय आचरण की अपेक्षा करती है। जब कैमरे के सामने देश का राष्ट्रीय गीत गूंज रहा हो, तब भी यदि नेतृत्व उसकी गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं करता, तो यह कांग्रेस की राष्ट्रभक्ति के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

दहल ने कहा, “जो लोग वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रभावना के प्रतीक के सामने दो मिनट पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ खड़े नहीं हो सकते, वे देश की जनता और उसकी भावनाओं का कितना सम्मान करते होंगे—यह सवाल आज हर देशवासी कांग्रेस से पूछ रहा है।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति और राष्ट्र सम्मान का पाठ पढ़ाने से पहले अपने नेताओं के आचरण पर ध्यान देना चाहिए। भारत माता के सम्मान के सामने राजनीति, विचारधारा और दलगत मतभेद गौण हो जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेताओं से देश की जनता अनुकरणीय आचरण की अपेक्षा करती है। जब कैमरे के सामने देश का राष्ट्रीय गीत गूंज रहा हो, तब भी यदि नेतृत्व उसकी गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं करता, तो यह कांग्रेस की राष्ट्रभक्ति के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

दहल ने कहा, “जो लोग वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रभावना के प्रतीक के सामने दो मिनट पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ खड़े नहीं हो सकते, वे देश की जनता और उसकी भावनाओं का कितना सम्मान करते होंगे—यह सवाल आज हर देशवासीदहल ने कहा, “जो लोग वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रभावना के प्रतीक के सामने दो मिनट पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ खड़े नहीं हो सकते, वे देश की जनता और उसकी भावनाओं का कितना सम्मान करते होंगे—यह सवाल आज हर देशवासी कांग्रेस से पूछ रहा है।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति और राष्ट्र सम्मान का पाठ पढ़ाने से पहले अपने नेताओं के आचरण पर ध्यान देना चाहिए। भारत माता के सम्मान के सामने राजनीति, विचारधारा और दलगत मतभेद गौण हो जाने चाहिए।

रूपेंद्र सिंह दहल ने कहा कि देश की जनता सब कुछ देख रही है और कैमरों के सामने हुआ आचरण जनता की स्मृति से मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की कि वह इस पूरे प्रकरण पर देशवासियों के सामने अपना स्पष्टीकरण दे और स्पष्ट करे कि वंदे मातरम् के सम्मान के समय उसके शीर्ष नेताओं का यह रवैया क्यों दिखाई दिया।

उन्होंने कहा कि भाजपा और युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं के लिए “वंदे मातरम्” भारत माता के प्रति श्रद्धा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उद्घोष है।

दहल ने कहा, “जो लोग वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रभावना के प्रतीक के सामने दो मिनट पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ खड़े नहीं हो सकते, वे देश की जनता और उसकी भावनाओं का कितना सम्मान करते होंगे—यह सवाल आज हर देशवासी कांग्रेस से पूछ रहा है।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति और राष्ट्र सम्मान का पाठ पढ़ाने से पहले अपने नेताओं के आचरण पर ध्यान देना चाहिए। भारत माता के सम्मान के सामने राजनीति, विचारधारा और दलगत मतभेद गौण हो जाने चाहिए।

रूपेंद्र सिंह दहल ने कहा कि देश की जनता सब कुछ देख रही है और कैमरों के सामने हुआ आचरण जनता की स्मृति से मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की कि वह इस पूरे प्रकरण पर देशवासियों के सामने अपना स्पष्टीकरण दे और स्पष्ट करे कि वंदे मातरम् के सम्मान के समय उसके शीर्ष नेताओं का यह रवैया क्यों दिखाई दिया।

उन्होंने कहा कि भाजपा और युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं के लिए “वंदे मातरम्” भारत माता के प्रति श्रद्धा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उद्घोष है।

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