ऊना-शिवानी ठाकुर

देवभूमि हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना की ग्राम पंचायत झंंबर के गांव लाम, झंंबर और सुरजेहडा़ के सानिध्य में चल रही श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा के चौथे दिन क्षेत्र के सुप्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य तरुण डोगरा ने अपने मुखारविंद से प्रवचनों की वर्षा करते हुए कहा कि विनम्रता का अर्थ सबकी सुन लेना नहीं, परंतु स्वयं की आत्मिक आवाज को सुन लेना है। विनम्र मनुष्य का अर्थ ही वह मनुष्य है, जो दूसरों की कम और स्वयं की आत्मा की आवाज को ज्यादा सुनता हो। और स्वयं की आवाज सुनने वाला मनुष्य कभी भी उग्र नहीं हो सकता, क्योंकि उग्रता का कारण ही केवल इतना सा है कि स्वयं की आवाज को अनसुना कर देना। उन्होने कहा कि कई बार हम कठिन दौर से गुजरते हैं यही जीवन है। जो हुआ है अच्छे के लिए हुआ है, हमें नकारात्मकता में भी सकारात्मकता ढूंढनी चाहिए। हमें जीवन को भरपूर जीना है और सकारात्मकता पर ध्यान देना है। उन्होने कहा कि हमारा अत्याधिक लगाव समस्याएं पैदा करता है। वह जो अपने प्रियजनों से अत्यधिक जुड़ा हुआ है। उसे चिंता और भय का सामना करना पड़ता है। क्योंकि सभी दुखों की जड़ लगाव है। इसलिए खुश रहने के लिए लगाव छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है कि राही जो पुत्र पैदा ही न हुआ हो अथवा पैदा होकर मृत हो अथवा मूर्ख हो, इन तीनों में पहले दो ही बेहतर हैं न कि तीसरा, कारण यह है कि प्रथम दोनों तो एक बार ही दु:ख देते हैं। जबकि तीसरा हर-पल दुखदायी होता है। इस दौरान उन्होंने अपने कृष्णमय भजनों से सैंकड़ों की तादाद में उपस्थित श्रद्धालुओं को ज्ञान गंगा की परवाह में मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने अपने मुखारविंद से मधुर प्रवचनों की वर्षा करते हुए कहा कि भगवान ने अनेक अवतारों में जन्म लेकर इस धरती को अधर्म से धर्म के मार्ग पर चलाया है और आज उस प्रभु के द्वारा ये सारी सृष्टि रचित है जिसे इस धरती का एक-एक जीव जानता है लेकिन आज के इस युग में लोग भगवान को न मानकर अपने आपको स्वंय भगवान का स्थान देने लगे हैं। जिससे इस धरती पर प्रलय आने का भी योग बन सकता है, क्योंकि अगर ये मानव रूपी जीवन स्वंय ही भगवान बन जाए, तो इस सारी सृष्टि का संचार कौन करेगा? उन्होने सैकड़ों की तादात में बैठे भक्तों को बताया कि बर्ष में एक बार इस मानव रूपी जीवन को सुप्रसिद्ध स्थान गया जी में जाकर अपने पूर्वजों का भगवान को साक्षी मानकर पिंडदान जरूर करना चाहिए, ताकि हमारे इस नश्वर जीवन का उद्धार हो सके। इस दौरान कथा पंडाल में ऐसे लग रहा था मानो भगवान श्री कृष्ण स्वंय धरती पर अवतार लेकर विराजमान हो गए है और मौजूद भक्तजन श्री राधा कृष्ण की लीलाओं में मंत्रमुग्ध हो गए हैं। उन्होने कहा कि अगर दिल में भगवान को पाना है तो प्रभु सिमरन मात्र से ही हमारे पास पंहुच जाते हैं। वहीं श्रीमद् भागवत कथा आयोजकों द्वारा पंडाल में श्रद्धालुओं के लिए बैठने की उचित सुव्यवस्था की गई है, इसके साथ ही प्रतिदिन लंगर भंडारे का भी आयोजन किया जा रहा है, और श्रद्धालु मन-चित लगाकर कथा श्रवण कर रहे हैं।



