नैनीताल–गोविन्द रावत

हल्द्वानी के बहुचर्चित बनभूलपुरा हिंसा मामले के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट में शनिवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सरोवर नगरी नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय ने मलिक को फिलहाल कोई राहत न देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तिथि नियत की है।
खंडपीठ ने पूछे कड़े सवाल
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अब्दुल मलिक के आपराधिक इतिहास (Criminal History) को लेकर कड़ा रुख अपनाया। खंडपीठ ने राज्य सरकार और आरोपी के अधिवक्ता से मलिक के खिलाफ दर्ज अन्य सात मुकदमों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
पुराने मामलों का ब्योरा तलब
कोर्ट ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले यह स्पष्ट किया जाए कि:
मलिक के खिलाफ कुल कितने मुकदमे विचाराधीन हैं?
किन मामलों में वह बरी हो चुका है?
कितने केसों में अभी जांच जारी है?
राज्य सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि जांच के दौरान अब्दुल मलिक के खिलाफ बनभूलपुरा कांड के अलावा सात अन्य मुकदमों की पुष्टि हुई है। सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि इनमें से कुछ मामलों में आरोपी बरी हो चुका है, जबकि कुछ अन्य मामलों का रिकॉर्ड अभी जुटाया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने सभी सात मुकदमों की “स्टेटस रिपोर्ट” पेश करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है मामला?
8 फरवरी को हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाने के दौरान भीषण हिंसा भड़क गई थी, जिसमें पथराव, आगजनी और गोलीबारी हुई थी। पुलिस ने अब्दुल मलिक को इस पूरी साजिश का ‘मास्टरमाइंड’ बताते हुए मुख्य आरोपी बनाया है। मलिक पर न केवल हिंसा भड़काने बल्कि नगर निगम की भूमि पर अवैध कब्जा करने और सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने के भी आरोप हैं।
अब 16 अप्रैल पर टिकी नजरें
हाईकोर्ट द्वारा मांगे गए पुराने मुकदमों के रिकॉर्ड के बाद अब 16 अप्रैल को होने वाली सुनवाई बेहद निर्णायक होगी। उसी दिन तय होगा कि अब्दुल मलिक को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा या उसे कोई राहत मिल पाएगी।



