Wednesday, June 10, 2026
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हिमाचल निकाय चुनाव: कोटली वार्ड से कांग्रेस जिला अध्यक्ष चंपा ठाकुर चुनाव हारीं, भाजपा समर्थित हेमलता ने हराया

कोटली वार्ड में कांग्रेस जिला अध्यक्ष चंपा ठाकुर पर भारी पड़ी हेमलता

जागो!शिमला/ टीना ठाकुर

हिमाचल प्रदेश में रविवार को घोषित हुए जिला परिषद चुनावों के शुरुआती नतीजों में भाजपा ने बढ़त बनाई है। हालांकि, कांग्रेस ने भी बहुमत का दावा किया है। घोषित 43 नतीजों में भाजपा समर्थित 29 और कांग्रेस समर्थित 14 सदस्यों ने रात दस बजे तक जीत दर्ज की। मतगणना देर रात तक जारी रही। उधर, मंडी के जिला परिषद वार्ड-31 कोटली से कांग्रेस के पूर्व मंत्री कौल सिंह की बेटी और जिला अध्यक्ष चंपा ठाकुर चुनाव हार गई हैं। भाजपा समर्थित हेम लता ने 2464 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।शिमला के सरस्वती नगर वार्ड से लोक गायक विक्की चौहान की पत्नी श्वेता चौहान को कांग्रेस समर्थित नेहा मेहता ने हराया। उधर, शिमला के चमियाना वार्ड से भाजपा समर्थित खुश विक्रम सेन चुनाव जीते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायत समिति (बीडीसी) सदस्यों के परिणाम घोषित होने के बाद शाम करीब 7 बजे जिला परिषद सदस्यों के मतों की गणना शुरू की गई। मतदान केंद्र में 15 से 20 टेबल लगाए गए। प्रति टेबल पर 4 कर्मचारी मतगणना करते रहे। वेब कास्टिंग के माध्यम से मतगणना पर नजर रखी गई। जिला परिषद चुनावों की मतगणना जिला मुख्यालयों और निर्धारित ब्लॉक केंद्रों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराई गई। मतगणना केंद्रों के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटी रही और परिणाम आते ही विजयी उम्मीदवारों के समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। भाजपा ने चुनाव से पहले जिला परिषद वार्डों के लिए समर्थित उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी थी और संगठन स्तर पर चुनाव को पूरी ताकत से लड़ा। दूसरी ओर कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से समर्थित उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की थी, हालांकि कई स्थानों पर पार्टी समर्थित उम्मीदवार मैदान में थे। भाजपा को संगठित रणनीति और पहले से घोषित समर्थन का लाभ शुरुआती परिणामों में मिलता दिखाई दिया। इस बार जिला परिषद के 250 वार्डों और बीडीसी के 1674 वार्डों के लिए चुनाव करवाए गए हैं। जिला परिषद चुनावों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई जिलों में मुकाबले बेहद कांटे के रहे और कुछ वार्डों में कम अंतर से जीत-हार तय हुई। चुनाव परिणामों पर दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की नजरें टिकी हुई हैं। 

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