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यह बात हिमाचल प्रदेश की राजनीति के बारे में पूरी जानकारी रखने वाले राष्ट्रीय इंटक के सचिव व प्रदेश इंटक के महासचिव कामरेड जगत राम शर्मा ने मीडिया को बताई और विस्तार से बताई की प्रदेश के प्रथम पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. वाईएस परमार को हिमाचल का निर्माता कहा जाता है। उनके संघर्ष से हिमाचल प्रदेश अस्तित्व में आया। उसके बाद नेहरू युग में राजनीति में हिस्सा लेने वाले स्वर्गीय वीरभद्र जी को हिमाचल में भरपूर विकास का श्रेय जाता है। जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कें, बिजली, पानी व अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हुईं हैं। वीरभद्र युग में सार्वजनिक क्षेत्र को भी बढ़ावा दिया गया है और नए रोजगार पैदा किए गए हैं। इसलिए वीरभद्र सिंह को मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों तथा आम गरीब लोगों का मसीहा कहा जाता है। अब सुक्खू सरकार ने केंद्रीय कांग्रेस पार्टी की घोषणा के मुताबिक और भाजपा के जबरदस्त विरोध के बावजूद कैबिनेट की पहली बैठक में ही पुरानी पेंशन बहाल कर दी और सभी पात्र लोगों को पेंशन देने का वायदा कर रहे हैं। कोई भी सार्वजनिक क्षेत्र का उद्योग नहीं बेचा जाएगा और न ही भाजपा द्वारा मजदूरों के विरुद्ध बनाई गई गलत नीतियों का अनुसरण किया। जिसमें आउटसोर्स, ठेकेदारी और पार्ट टाइम आदि के प्रचलन को रोका गया। हाल ही में किशाऊ बांध का समझौता छह मुख्यमंत्रियों तथा अमित शाह गृह मंत्री की उपस्थिति में हुआ।

उसमें भी हिमाचल प्रदेश व सुक्खू की बल्ले- बल्ले हो गई। क्योंकि समझौते में हिमाचल में शर्तें मान ली गई और उसके खर्चा आने का भी दूसरे लाभ लेने वाले प्रदेश ही उठाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस किशाऊ बांध में पचास प्रतिशत हिमाचल लोगों को ही रखा जाएगा। बताया कि हिमाचल सरकार सभी हिमाचलियों मजदूरों किसानों कर्मचारियों के हक की लड़ाई केंद्र से बखूबी लड़ रही है। इसके श्रेय भी सुक्खू सरकार को जाता है। जगत राम ने पूर्व सरकारी कर्मचारियों, वर्तमान कर्मचारियों तथा भविष्य में सरकारी नौकरी में आने वाले लोगों को याद दिलाया कि काम नहीं तो दाम नहीं का नारा पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने दिया था। उसके बाद ऐसे फैसले अदालतों ने भी कर दिए और कई कर्मचारी विरोधी निर्णय लिए गए। मोदी सरकार अब भी कह रही है कि अगर हिमाचल में दी जा रही पुरानी पेंशन को बंद कर दे तो आरडीजी बहाल कर देंगे। प्रदेश के लोगों को एकजुट होकर भाजपा की आर्थिक नीतियों का डटकर विरोध करना चाहिए।
