रिपोर्ट भगवान सिंह पौड़ी गढ़वाल

नैनीडांडा से पौड़ी आई महिलाओ ने डीएफओ गढ़वाल के कार्यलय मे जमकर किया बबाल, डीएफओ गढ़वाल के छूते पसीने
पौड़ी | प्रशासन की पीठ थपथपाहट बनाम ज़मीनी हकीकत
पिरूल पर प्रचार, भुगतान पर चुप्पी महिलाओं को दर-दर भटकाता वन विभाग, 6 घंटे बाद मिले DFO फिर भी नहीं मिला मेहनतनामा
एंकर :-जिस पिरूल एकत्रीकरण अभियान को लेकर जिला प्रशासन और सरकार अपनी पीठ थपथपा रही थी, उसी अभियान की असली हकीकत अब सड़कों पर उतर आई है। पिरूल एकत्रीकरण का काम करने वाली महिलाएं आज अपने ही मेहनताने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
भुगतान न होने से नाराज नेनीडांडा क्षेत्र की महिलाओं ने गुरुवार को पौड़ी पहुंचकर डीएफओ गढ़वाल कार्यालय का घेराव किया। हैरानी की बात यह रही कि पहले तो अधिकारियों ने महिलाओं से मिलने से साफ इनकार कर दिया, लेकिन जब दबाव बढ़ा और विरोध तेज हुआ, तब करीब 6 घंटे बाद डीएफओ गढ़वाल महिलाओं से मिलने को मजबूर हुए।
गढ़वाल वन प्रभाग कार्यालय पहुंची नई पहल फेडरेशन से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि उन्होंने वन विभाग, फेडरेशन और फर्म के बीच हुए अनुबंध के तहत पिरूल एकत्रीकरण का कार्य किया। अनुबंध के अनुसार महिलाओं ने करीब 16 हजार कुंतल पिरूल एकत्र किया, जिसकी कुल राशि लगभग 1 करोड़ 21 लाख रुपये बैठती है।
लेकिन आरोप है कि वन विभाग अब तक इस भुगतान को रोके बैठा है।
महिलाओं का कहना है कि भुगतान न मिलने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सरकारी योजनाओं में दिन-रात पसीना बहाने वाली ये महिलाएं आज सिस्टम की लापरवाही और अफसरशाही की बेरुखी का शिकार बन गई हैं।
प्रश्न साफ है—
जब सरकार और प्रशासन पिरूल अभियान की सफलता का ढोल पीट रहे थे, तब क्या मेहनत करने वाली महिलाओं को उनका हक देना भूल गए?
क्या महिला सशक्तिकरण सिर्फ फाइलों और मंचों तक ही सीमित है?
यह मामला सिर्फ भुगतान का नहीं, बल्कि सरकारी दावों और ज़मीनी सच्चाई के बीच गहरी खाई को उजागर करता है। अब देखना होगा कि वन विभाग और सरकार कब तक इस अन्याय पर चुप्पी साधे रहती
मौके पर श्रीमती संगीता रावत श्रीमती दीपा देवी,मीना देवी गणेशी देवी कल्पना देवी गौर सिंह रावत रीना देवी बीना देवी कल्पना रावत सुमन ममता बबली बिमला मीणा गणेशी रीना मौजूद रही
बाईट1, महातिम यादव DFO गढ़वाल
बाईट2, संगीता CLF अध्यक्ष
बाईट 3 सुमन गायत्री समूह अध्यक्ष
बाईट4 ममता गौरी समूह सचिव
बाईट5 गोर सिंह रावत वर्कर

