ऊना-ब्यूरो रिपोर्ट

पंचम दिवस पर पूतना उद्धार, कालिय नाग मर्दन व गोवर्धन लीला का हुआ वर्णन, रोजाना विशाल भंडारे से भक्तों की हो रही सेवा,
ऊना, पलोह गांव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के दौरान पंचम दिवस पर भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी विवाह का मनोहारी प्रसंग श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में डूब गया और श्रद्धालु इस दिव्य विवाह के साक्षी बने। कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर परम श्रद्धेय भागवताचार्य श्री अतुल कृष्ण जी महाराज ने अपने अमृतवचनों से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति प्रभु के चरणों में पूर्ण समर्पण कर देता है, उसे जीवन की मझधार में भी किनारा मिल जाता है। उन्होंने बताया कि संसार से अनासक्त रहने वाला व्यक्ति सफलता और असफलता, यश और अपयश को समान रूप से स्वीकार करता है, जिससे उसके जीवन में स्थिरता और शांति बनी रहती है। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि सच्ची प्रार्थना और पूजा के लिए मनुष्य को अपने भीतर झांकने की आवश्य कता होती है। परमात्मा को प्राप्त करना कोई चमत्कार नहीं, बल्कि जीवन की सबसे सहज घटना है। उन्होंने बताया कि मनुष्य का प्रेम यदि परमात्मा से जुड़ जाए तो जीवन सफल हो जाता है, लेकिन अक्सर मनुष्य का प्रेम सांसारिक वस्तुओं में उलझ जाता है, जो स्थायी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि ईश्वरीय प्रेम मनुष्य जीवन की सबसे पवित्र अवस्था है और इसी में आत्मा की सच्ची खुशबू बसती है।
कथा व्यास ने आगे कहा कि मनुष्य की निराशा का कारण संसार नहीं, बल्कि उसकी अपनी आशाएं होती हैं। जब व्यक्ति अत्यधिक आशाएं बांध लेता है, तो निराशा भी उसी अनुपात में बढ़ जाती है। यदि मनुष्य आशाओं को सीमित कर दे, तो जीवन में संतोष और प्रसन्नता का अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने इसे जीवन का महागणित बताते हुए कहा कि जिसने इस सत्य को समझ लिया, वह सदैव प्रसन्न रह सकता है। इस अवसर पर भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिनमें पूतना उद्धार, माखन चोरी, कालिय नाग मर्दन और गोवर्धन धारण की लीलाएं शामिल रहीं। श्रद्धालुओं ने इन लीलाओं को अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से सुना। वहीं श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग के दौरान कथा स्थल पर विवाह जैसा माहौल बना, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और जयकारों के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। कथा के मुख्य यजमान किशन देव शर्मा और उनके परिवार द्वारा इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में विशेष योगदान दिया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य तरसेम धीमान, सूबेदार अवतार सिंह, हवलदार विजय कुमार, रमेश शर्मा, राकेश शर्मा, अभिषेक शर्मा, सृजन शर्मा, सीमा पटियाल, सुदर्शना कुमारी, अनुराधा शर्मा, मीनू शर्मा, रेणु भारद्वाज, अनुराधा गर्ग, ममता शर्मा और शीतला शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा के दौरान प्रतिदिन किशन देव शर्मा और उनके परिवार द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए रहने और भोजन की उत्तम व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है। पलोह गांव में आयोजित यह श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव पूरे क्षेत्र में आस्था और भक्ति का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा स्थल पर पहुंचकर कथा का श्रवण कर रहे हैं और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कर रहे हैं। आयोजकों के अनुसार आगामी दिनों में भी कथा के दौरान भगवान की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति का संदेश मिलता रहेगा।

