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पंजाब विधानसभा के शून्यकाल में कर्मचारियों और पेंशनरों के 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक के लंबित डीए का मुद्दा प्रमुखता से उठा।

पंजाब विधानसभा सत्र के दूसरे दिन शून्यकाल के दौरान कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित डीए से लेकर बंदी सिंहों की रिहाई, खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के सांसद निधि फंड, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, इंतकालों के निपटारे, स्कूल शिक्षकों के वेतन, किसानों की ट्यूबवेल मोटरों के बंटवारे, सड़क और जलभराव, टांगरी नदी की सफाई, नगर निगम के विकास कार्यों, खन्ना के गंदे पानी और पंचायतों के विकास कार्यों के रेट समेत कई मुद्दे उठाए गए।नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने करीब सात लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के करीब चार साल से लंबित डीए का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों का बकाया डीए करीब 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक बनता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि कर्मचारियों को उनका हक जल्द से जल्द दिया जाए बाजवा ने अदालत में चले मामले का जिक्र करते हुए कहा कि मामला पहले एकल पीठ के समक्ष गया था और बाद में सरकार की ओर से इसे खंडपीठ के समक्ष ले जाया गया। उन्होंने कहा कि खंडपीठ ने 15 दिन के भीतर छह प्रतिशत ब्याज के साथ बकाया राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की कि वित्त मंत्री से सदन में सरकार का स्पष्ट बयान लिया जाए कि कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका हक समय पर मिलेगा और सरकार भुगतान में देरी के लिए मामले को आगे सुप्रीम कोर्ट में नहीं ले जाएगी।
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प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि सरकारी कर्मचारी और पेंशनर प्रदेश का बड़ा वोट बैंक हैं और उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के हित में स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की। हालांकि, उनके द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया।प्रताप सिंह बाजवा ने सफाई कर्मचारियों, मनरेगा कर्मियों और अन्य ठेका कर्मचारियों को नियमित करने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन कर्मचारियों को पक्का करने के संबंध में स्पष्ट आश्वासन दिया जाए और चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले इस दिशा में ठोस फैसला लिया जाए।विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि शून्यकाल में सदस्य का काम मुद्दे को सरकार के ध्यान में लाना होता है और यह जरूरी नहीं कि हर मुद्दे पर सरकार की ओर से बयान आए।शून्यकाल के दौरान अकाली विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने बंदी सिंहों की रिहाई और खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़े मामलों को सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले अकाली दल की ओर से पंजाब के मुख्यमंत्री को बंदी सिंहों की रिहाई और पैरोल के संबंध में मांगपत्र दिया गया था।मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि भाई जगतार सिंह हवारा, बलवंत सिंह राजोआणा, देविंदर पाल सिंह भुल्लर, गुरदीप सिंह खेड़ा, लखविंदर सिंह लक्खा और गुरमीत सिंह मीता समेत कई बंदी सिंह लंबे समय से जेलों में बंद हैं। उन्होंने मांग की कि उन्हें पैरोल देने के साथ-साथ उनकी रिहाई पर भी विचार किया जाना चाहिए।अयाली ने कहा कि जिस तरह कुछ अन्य मामलों में पैरोल जल्दी मिल जाती है, उसी तरह बंदी सिंहों के मामले में भी मानवीय आधार पर विचार किया जाना चाहिए।इसके बाद उन्होंने खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह का मामला उठाते हुए कहा कि वह करीब चार लाख वोटों से चुनाव जीते और उनकी जीत का अंतर करीब दो लाख वोट था। इसके बावजूद उनके सांसद निधि फंड जारी नहीं किए गए हैं।मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि अमृतपाल सिंह को पहले राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जेल में रखा गया और अब राष्ट्रीय सुरक्षा कानून खत्म होने के बावजूद उन्हें पंजाब से बाहर रखा जा रहाउन्होंने कहा कि अमृतपाल सिंह के संसद सत्र में शामिल होने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल है, लेकिन पंजाब सरकार की ओर से बार-बार तारीख मांगी जा रही है, जिससे मामला लंबा खिंच रहा है।उन्होंने पंजाब सरकार से इस मामले में सकारात्मक भूमिका निभाने की मांग की, ताकि अमृतपाल सिंह संसद सत्र में शामिल होकर अपने क्षेत्र और पंजाब की आवाज उठा सकें।एक विधायक ने इंतकालों के लंबित मामलों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इंतकाल 30 दिन के भीतर पूरा किया जाना चाहिए, लेकिन टेक्स्ट एंट्री सहित अन्य प्रक्रियाओं के कारण कई मामलों का समय पर निपटारा नहीं हो रहा।उन्होंने मांग की कि इंतकाल की अंतिम मंजूरी का अधिकार जिला स्तर पर डिप्टी कमिश्नर या जिला राजस्व अधिकारी को दिया जाए। इससे लोगों की खज्जल-खुआरी कम होगी और लंबित मामलों का समय पर निपटारा हो सकेगा।. सुखी ने बंगा विधानसभा क्षेत्र के जद्दियाला स्थित एफसीएस आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षकों की समस्या सदन में उठाई। उन्होंने कहा कि स्कूल में करीब ढाई से तीन हजार बच्चे पढ़ते हैं और शिक्षक पिछले सप्ताह से हड़ताल पर हैं।उन्होंने कहा कि पंजाब में इस तरह के करीब 10-12 स्कूल हैं, जिन्हें पहले निजी प्रबंधन द्वारा चलाया जाता था और सरकार की ओर से सहायता दी जाती थी। निजी कंपनियों के पीछे हटने के बाद अब इन स्कूलों का संचालन सरकार कर रही है।. सुखी ने कहा कि एसबीएस नगर जिले के दो स्कूलों के शिक्षकों का वेतन नहीं बढ़ा है, जबकि अन्य जिलों में वेतन वृद्धि की गई है। उन्होंने सरकार से इन शिक्षकों का वेतन बढ़ाने की मांग की, ताकि हड़ताल खत्म हो और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
